झारखंड की राजधानी रांची समेत राज्य के कई हिस्सों में छात्रों का आंदोलन मंगलवार को उग्र रूप ले लिया, जिसके बाद पुलिस की सख्त कार्रवाई और विपक्षी दलों के हस्तक्षेप से सियासी पारा चरम पर पहुंच गया है। छात्र अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सड़कों पर उतरे थे, जहां पुलिस के साथ हुई झड़प के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। प्रदर्शनकारियों ने कई जगहों पर सड़कें जाम कर दीं और टायर जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया, जिससे सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। हालात की गंभीरता को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी ने बुधवार को राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया है, जिसे लेकर प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। इस पूरे घटनाक्रम पर राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर तेजी से शुरू हो गया है। भाजपा ने जहां हेमंत सोरेन सरकार पर छात्रों के दमन का आरोप लगाते हुए कांग्रेस से समर्थन वापस लेने की मांग की है, वहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पुलिस की बर्बर कार्रवाई की कड़ी निंदा की है। राहुल गांधी ने कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का उपयोग लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। उधर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सैम पित्रोदा ने भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों को विचलित करने वाला बताते हुए बल प्रयोग पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। विपक्षी एकजुटता के संकेत देते हुए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी झारखंड के छात्र आंदोलन को अपना खुला समर्थन दिया है। केजरीवाल ने ट्वीट कर छात्रों की मांगों को जायज ठहराया और हेमंत सोरेन सरकार से संवेदनशीलता दिखाने की अपील की। इधर, भाजपा द्वारा बुलाए गए बंद के मद्देनजर रांची, जमशेदपुर, धनबाद समेत प्रमुख शहरों में दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे, जबकि सड़कों पर वाहनों की आवाजाही न के बराबर रही। प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च स्तरीय बैठक बुलाकर अधिकारियों को हालात पर नियंत्रण बनाए रखने और छात्रों से संवाद स्थापित करने का निर्देश दिया है। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए बल प्रयोग का सहारा ले रही है। छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा। कुल मिलाकर झारखंड में छात्र आंदोलन अब केवल छात्रों की मांगों तक सीमित न रहकर एक बड़े राजनीतिक मुद्दे में तब्दील हो चुका है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जारी आरोप-प्रत्यारोप के बीच आम जनता और छात्रों के भविष्य पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। अब सबकी निगाहें सरकार के अगले कदम और बंद के बाद की स्थिति पर टिकी हैं, क्योंकि शांति बहाली और संवाद ही इस गतिरोध को तोड़ने का एकमात्र रास्ता नजर आ रहा है।