संसद के मानसून सत्र की शुरुआत में अब महज चार दिन शेष रह गए हैं, लेकिन आज जारी किए गए संसदीय कार्यवाही के एजेंडे से कई अहम विधेयक नदारद दिखे। इस चूक ने विपक्ष को सरकार की मंशा पर सवाल उठाने का एक और मौका दे दिया है। सत्र से ठीक पहले विधायी कार्यसूची में स्पष्टता की कमी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। जानकारों का मानना है कि सरकार की प्राथमिकता विवादास्पद विधेयकों को लेकर सहमति बनाने की बजाय उन्हें फिलहाल ठंडे बस्ते में डालने की नजर आ रही है।