झारखंड में संयुक्त स्नातक स्तरीय (सीजीएल) परीक्षा और जेपीएससी भर्ती में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार उग्र होता जा रहा है। शुक्रवार को सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच छठे दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। छात्रों की मुख्य मांग सीजीएल परीक्षा रद्द करने और जेपीएससी घोटाले की सीबीआई जांच कराने की है। सरकार ने परीक्षा रद्द करने पर सहमति जताई है, लेकिन छात्र सीबीआई जांच की मांग पर अड़े हुए हैं और आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया है। इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने छात्रों के आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने छात्रों को न्याय दिलाने का आश्वासन देते हुए कहा कि "न्याय होगा" और सरकार पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के लिए प्रतिबद्ध है। हालांकि, छात्र नेताओं का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, ठोस कार्रवाई चाहिए। आंदोलनरत छात्रों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे, जिसमें राज्यव्यापी बंद और राजभवन घेराव जैसे कदम शामिल हो सकते हैं। छात्रों का आरोप है कि जेपीएससी और सीजीएल परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर धांधली हुई है और योग्य अभ्यर्थियों के साथ अन्याय किया गया है। इस पूरे प्रकरण में नया मोड़ तब आया जब झारखंड के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन ने जेपीएससी के तीन सदस्यों के इस्तीफे स्वीकार कर लिए। इसे छात्रों के दबाव की बड़ी जीत माना जा रहा है, लेकिन छात्र नेता इसे नाकाफी बता रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक पूरी भर्ती प्रक्रिया की सीबीआई जांच नहीं होती और दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। विपक्षी दल भाजपा ने भी सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए छात्रों का साथ दिया है, जबकि सत्ताधारी गठबंधन आंदोलन को राजनीति से प्रेरित बता रहा है। शिक्षा मंत्री और अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत के बावजूद गतिरोध बरकरार है। छात्रों का प्रतिनिधिमंडल बार-बार यही मांग दोहरा रहा है कि सीजीएल परीक्षा पूरी तरह रद्द हो और जेपीएससी की सभी संदिग्ध भर्तियों की सीबीआई जांच हो। सरकार की ओर से परीक्षा रद्द करने की घोषणा तो की गई है, लेकिन सीबीआई जांच की सिफारिश करने से सरकार हिचक रही है। इस बीच, रांची समेत राज्य के कई जिलों में छात्र सड़कों पर उतर आए हैं और धरना-प्रदर्शन जारी है। पुलिस और प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए मुस्तैद है। इस पूरे घटनाक्रम से झारखंड के लाखों प्रतियोगी छात्रों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। एक तरफ जहां सरकार अपनी साख बचाने की कोशिश कर रही है, वहीं छात्र अपने हक की लड़ाई लड़ रहे हैं। राजनीतिक दल भी अपने-अपने हित साधने में लगे हैं। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में यह गतिरोध कैसे टूटता है और क्या छात्रों को न्याय मिल पाता है। फिलहाल, राज्य में तनाव का माहौल है और सभी की निगाहें अगली बैठक और सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं।