एयर इंडिया की एक उड़ान में गंभीर टर्बुलेंस की घटना के बाद विमान के कप्तान के डोप टेस्ट में फेल होने की आशंका जताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, फुकेत से दिल्ली आ रही उड़ान संख्या एआई-376 में गत दिनों भयानक टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा था, जिसके चलते विमान को अचानक ऊंचाई खोनी पड़ी थी। इस घटना के तुरंत बाद नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के निर्देशानुसार चालक दल के सदस्यों की नियमित जांच की गई, जिसमें कप्तान का प्रारंभिक डोप टेस्ट 'निगेटिव नहीं' पाया गया है। घटना के विवरण के अनुसार, उड़ान के दौरान अचानक आए भीषण टर्बुलेंस के कारण विमान लगभग 1,000 फीट नीचे आ गया था, जिससे यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई थी। विमान सुरक्षित दिल्ली उतर गया, लेकिन इस गंभीर घटना ने विमानन सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े कर दिए। डीजीसीए ने तत्काल जांच के आदेश देते हुए चालक दल के ब्लड और यूरिन सैंपल जांच के लिए भेजे थे। सूत्रों का कहना है कि कप्तान के सैंपल की प्रारंभिक स्क्रीनिंग में किसी साइकोएक्टिव पदार्थ की मौजूदगी के संकेत मिले हैं, हालांकि इसकी पुष्टि के लिए सैंपल को कन्फर्मेटरी टेस्ट के लिए भेजा गया है। नागर विमानन मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि करते हुए बताया कि कप्तान का स्क्रीनिंग टेस्ट निगेटिव नहीं आया है और इसे कन्फर्मेटरी टेस्ट के लिए रेफर किया गया है। एयर इंडिया ने भी एक बयान जारी कर कहा है कि वह जांच में पूरा सहयोग कर रही है और सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। एयरलाइन ने कप्तान को जांच पूरी होने तक उड़ान ड्यूटी से हटा दिया है। डीजीसीए इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या टर्बुलेंस की घटना और पायलट की संभावित स्थिति में कोई संबंध है। विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना भारतीय विमानन क्षेत्र में पायलटों के स्वास्थ्य और नशीले पदार्थों के परीक्षण की कठोरता पर गंभीर सवाल उठाती है। पिछले कुछ महीनों में एयर इंडिया से जुड़ी कई सुरक्षा संबंधी घटनाएं सामने आई हैं, जिससे नियामक संस्थाओं की निगरानी प्रणाली पर दबाव बढ़ा है। डीजीसीए ने सभी एयरलाइंस को चालक दल के सदस्यों की रैंडम ब्रीथ एनालाइजर और डोप टेस्टिंग प्रक्रिया को और सख्त बनाने के निर्देश दिए हैं। इस पूरे प्रकरण का अंतिम निष्कर्ष कन्फर्मेटरी टेस्ट की रिपोर्ट आने के बाद ही निकल सकेगा। यदि कप्तान दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई के साथ-साथ लाइसेंस निलंबन या रद्दीकरण भी संभव है। यह घटना पूरे विमानन उद्योग के लिए एक चेतावनी है कि सुरक्षा मानकों से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार्य नहीं है। यात्रियों का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शी जांच और दोषियों पर त्वरित कार्रवाई अनिवार्य है।