आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और दिल्ली के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिल्ली सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि चावल खरीद में 22 हजार करोड़ रुपये के घोटाले की बड़ी साजिश रची जा रही है। भारद्वाज ने दावा किया कि यह घोटाला सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गरीबों को मिलने वाले चावल की खरीद में अनियमितताओं के जरिए किया जा रहा है। उन्होंने संबंधित दस्तावेज और आंकड़े पेश करते हुए कहा कि इस पूरे खेल में बड़े अधिकारी और ठेकेदार मिले हुए हैं, जिसका खामियाजा अंततः दिल्ली के लाखों गरीब परिवारों को भुगतना पड़ेगा। भारद्वाज ने विस्तार से बताया कि दिल्ली सरकार द्वारा चावल खरीद के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव है और मनमाने ढंग से चुनिंदा कंपनियों को फायदा पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि खरीद मूल्य बाजार दर से कहीं अधिक तय किया गया है, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान हो रहा है। इसके अलावा, चावल की गुणवत्ता जांच में भी ढिलाई बरती जा रही है, जिसके चलते घटिया चावल गोदामों में भरा जा रहा है। AAP नेता ने कहा कि इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराई जानी चाहिए, ताकि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो सके। दिल्ली सरकार की ओर से अभी तक इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सरकार इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता सकती है। वहीं, विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को लपकते हुए मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग शुरू कर दी है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने कहा है कि यदि आरोपों में सच्चाई है तो यह दिल्ली के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला साबित होगा। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी गरीबों के राशन में हेराफेरी को गंभीर अपराध बताते हुए त्वरित कार्रवाई की मांग की है। इस बीच, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारियों ने आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं और संबंधित फाइलों को जब्त कर लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच निष्पक्ष हुई तो कई बड़े चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। AAP नेता सौरभ भारद्वाज ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने पारदर्शी जांच नहीं कराई तो पार्टी सड़क से लेकर अदालत तक लड़ाई लड़ेगी। उन्होंने दिल्ली के उपराज्यपाल से भी हस्तक्षेप की अपील की है। निष्कर्षतः, 22 हजार करोड़ रुपये के कथित चावल घोटाले के आरोप ने दिल्ली की राजनीति में भूचाल ला दिया है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और सरकार की प्रतिक्रिया तय करेगी कि यह मामला कितना गंभीर रूप लेता है। फिलहाल, जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि गरीबों के निवाले पर डाका डालने वालों को सजा मिलेगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।