झारखंड में JPSC (झारखंड लोक सेवा आयोग) की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। मंगलवार को सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच दूसरे दौर की वार्ता भी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी, जिससे गतिरोध बरकरार है। छात्र नेता पिछले 15 दिनों से आमरण अनशन पर बैठे हैं और उनकी हालत दिन-ब-दिन बिगड़ती जा रही है। इस पूरे प्रकरण ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है और अब बॉलीवुड अभिनेता पीयूष मिश्रा जैसे चर्चित चेहरे भी छात्रों के समर्थन में खुलकर सामने आ गए हैं। वार्ता के बाद छात्र नेताओं ने बताया कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने के बजाय केवल आश्वासन दे रही है। छात्रों की प्रमुख मांग है कि JPSC की विवादित परीक्षाओं को रद्द कर नए सिरे से पारदर्शी तरीके से कराया जाए, साथ ही पेपर लीक मामले की उच्चस्तरीय जांच हो। सरकार की ओर से कहा गया है कि वह जल्द ही तीसरे दौर की वार्ता आयोजित करेगी, लेकिन छात्रों का भरोसा टूट चुका है। अनशन पर बैठे छात्र नेता ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "मेरे शरीर के अंग अब साथ नहीं दे रहे, लेकिन जब तक न्याय नहीं मिलता, यह लड़ाई जारी रहेगी।" इस बीच, अभिनेता पीयूष मिश्रा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर छात्रों के आंदोलन को अपना समर्थन दिया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जा सकता और सरकार को तुरंत ठोस कदम उठाने चाहिए। उनके इस समर्थन के बाद आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है। वहीं, विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए विधानसभा में हंगामा किया और मुख्यमंत्री से स्पष्टीकरण मांगा है। चिकित्सकों की टीम अनशनकारी छात्रों के स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है और उनकी हालत चिंताजनक बताई जा रही है। प्रशासन ने अस्पताल में भर्ती कराने की सलाह दी है, लेकिन छात्रों ने इसे ठुकरा दिया है। उनका कहना है कि जब तक लिखित आश्वासन नहीं मिलता, वे अनशन नहीं तोड़ेंगे। इस पूरे घटनाक्रम से राज्य के लाखों प्रतियोगी छात्रों में रोष है और वे सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं। सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है - एक तरफ छात्रों का स्वास्थ्य और जनाक्रोश, दूसरी तरफ JPSC की साख बचाना। जानकारों का मानना है कि अगर जल्द ही कोई ठोस हल नहीं निकला तो यह आंदोलन राज्यव्यापी रूप ले सकता है। सभी की निगाहें अब तीसरे दौर की वार्ता पर टिकी हैं, जिससे उम्मीद की जा रही है कि कोई बीच का रास्ता निकलेगा और छात्रों को न्याय मिलेगा।