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Breaking News: तमिलनाडु में परिसीमन के विरोध में सर्वदलीय बैठक के बाद प्रस्ताव पारित, डीएमके और एआईएडीएमके ने बनाई दूरी
🕒 1 month ago

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने परिसीमन के मुद्दे पर चर्चा के लिए बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद राज्य विधानसभा में परिसीमन के विरोध में प्रस्ताव पारित करने की घोषणा की है। इस बैठक में राज्य के 57 सांसदों में से 21 सांसदों ने भाग लिया, जबकि प्रमुख विपक्षी दल डीएमके और एआईएडीएमके ने इस बैठक का बहिष्कार किया। बैठक में उपस्थित सभी दलों ने एकमत से परिसीमन विधेयक को खारिज करते हुए लोकसभा सीटों की संख्या को स्थायी रूप से फ्रीज करने की मांग केंद्र सरकार से की है। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया तमिलनाडु जैसे राज्यों के लिए अन्यायपूर्ण होगी, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को सफलतापूर्वक लागू किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्निधारण उन राज्यों को दंडित करने जैसा होगा जिन्होंने राष्ट्रीय लक्ष्यों में योगदान दिया है। बैठक में उपस्थित सांसदों और राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर केंद्र से मांग की कि 1971 की जनगणना को आधार मानकर सीटों का आवंटन किया जाए या वर्तमान व्यवस्था को स्थायी रखा जाए। डीएमके और एआईएडीएमके की अनुपस्थिति ने इस बैठक की राजनीतिक गंभीरता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एआईएडीएमके ने अपने बहिष्कार का बचाव करते हुए कहा कि यह बैठक महज एक राजनीतिक दिखावा है और मुख्यमंत्री विजय इस मुद्दे पर गंभीर नहीं हैं। वहीं डीएमके ने भी इसी तरह के आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य सरकार को इस मुद्दे पर सर्वदलीय सहमति बनाने के लिए ईमानदार प्रयास करने चाहिए थे। दोनों प्रमुख दलों की गैरमौजूदगी के बावजूद, बैठक में शामिल अन्य दलों ने प्रस्ताव का समर्थन किया और इसे तमिलनाडु के हित में जरूरी कदम बताया। इस प्रस्ताव को अब तमिलनाडु विधानसभा में पेश किया जाएगा, जहां इसके पारित होने की पूरी संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम तमिलनाडु की राजनीति में परिसीमन को एक प्रमुख मुद्दा बना देगा और आगामी चुनावों में इसका असर देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार पर दबाव बनाने के लिए तमिलनाडु अन्य दक्षिणी राज्यों के साथ भी समन्वय स्थापित करने की योजना बना रहा है, ताकि संसद में इस मुद्दे पर संयुक्त मोर्चा बनाया जा सके। निष्कर्ष के तौर पर कहा जा सकता है कि तमिलनाडु ने परिसीमन के खिलाफ अपनी लड़ाई को तेज कर दिया है। हालांकि प्रमुख विपक्षी दलों की अनुपस्थिति से इस लड़ाई की एकता प्रभावित हुई है, लेकिन राज्य सरकार अपने रुख पर अडिग है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार तमिलनाडु की इस मांग पर क्या प्रतिक्रिया देती है और क्या यह मुद्दा राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े राजनीतिक विवाद का रूप लेता है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 08 Aug 2026