दिल्ली पुलिस ने एक बड़े खुफिया ऑपरेशन के तहत भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर को गिरफ्तार किया है, जिस पर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी के लिए जासूसी करने और संवेदनशील रक्षा सूचनाएं लीक करने का गंभीर आरोप है। यह पूरा मामला एक सुनियोजित हनी ट्रैप का नतीजा है, जिसमें पाकिस्तानी हैंडलर ने एक महिला बनकर विंग कमांडर को अपने जाल में फंसाया और फिर उससे गोपनीय जानकारियां हासिल कीं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने करीब चार महीने तक चले इस ऑपरेशन के बाद विंग कमांडर को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, विंग कमांडर पिछले कई महीनों से एक अज्ञात महिला के साथ सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स के जरिए संपर्क में था। यह महिला वास्तव में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई की एजेंट थी, जिसने अपनी असली पहचान छिपाकर विंग कमांडर से दोस्ती बढ़ाई। धीरे-धीरे बातचीत का सिलसिला निजी और फिर पेशेवर जानकारियों तक पहुंच गया। महिला एजेंट ने विंग कमांडर को अपने विश्वास में लेकर वायुसेना के ऑपरेशनल मूवमेंट्स, एयरबेस की तैनाती, विमानों की तकनीकी जानकारियां और अन्य संवेदनशील सूचनाएं हासिल कर लीं। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को इस जासूसी नेटवर्क की भनक काफी पहले लग गई थी, जिसके बाद विंग कमांडर को निगरानी में रखा गया। करीब चार महीने तक चली इस निगरानी के दौरान पुलिस ने उसके फोन कॉल्स, मैसेजेस, लोकेशन डेटा और ऑनलाइन गतिविधियों को बारीकी से ट्रैक किया। इस दौरान यह पुष्टि हुई कि विंग कमांडर नियमित रूप से पाकिस्तानी हैंडलर को क्लासीफाइड जानकारियां भेज रहा था। पुख्ता सबूत जुटाने के बाद दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक रूप से उसे गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद विंग कमांडर से गहन पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि उसने अब तक कितनी और किस स्तर की सूचनाएं लीक की हैं, साथ ही यह भी जांचा जा रहा है कि क्या इस नेटवर्क में वायुसेना का कोई अन्य अधिकारी या कर्मचारी भी शामिल है। वायुसेना मुख्यालय ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। आरोपी विंग कमांडर के खिलाफ ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट और अन्य संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। यह घटना एक बार फिर सशस्त्र बलों के कर्मियों को सोशल इंजीनियरिंग और हनी ट्रैप के जरिए निशाना बनाने की पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों की साजिश को उजागर करती है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल युग में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त साइबर सुरक्षा प्रोटोकॉल, नियमित जागरूकता कार्यक्रम और कर्मियों की ऑनलाइन गतिविधियों की निगरानी बेहद जरूरी है। इस गिरफ्तारी को भारतीय खुफिया एजेंसियों की एक बड़ी कामयाबी माना जा रहा है, जिससे पाकिस्तान के जासूसी नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।