📰 Kotputli News
Breaking News: जेपीएससी परीक्षा में देरी और भ्रष्टाचार के आरोपों पर छात्रों का आंदोलन जारी, सरकार से पहली वार्ता रही बेनतीजा
🕒 1 month ago

झारखंड में जेपीएससी (झारखंड लोक सेवा आयोग) की परीक्षाओं में लंबे समय से हो रही देरी और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों को लेकर छात्रों का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। रांची में पिछले कई दिनों से धरने पर बैठे अभ्यर्थियों और राज्य सरकार के प्रतिनिधियों के बीच पहली दौर की वार्ता मंगलवार को हुई, लेकिन इसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकल सका। वार्ता के बेनतीजा रहने के बाद आक्रोशित छात्रों ने अपना अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन जारी रखने का ऐलान किया है। छात्र नेताओं का कहना है कि सरकार महज आश्वासन दे रही है, जबकि उनकी मांग ठोस कार्रवाई और तय समयसीमा में परीक्षा कैलेंडर जारी करने की है। इस आंदोलन की पृष्ठभूमि में वर्षों से लंबित पड़ी जेपीएससी की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाएं और उनमें कथित तौर पर हुई अनियमितताएं हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि सातवीं से दसवीं जेपीएससी परीक्षा के परिणामों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है और चयन प्रक्रिया में रिश्वतखोरी व भाई-भतीजावाद चला है। कई वर्षों से परीक्षाओं का कैलेंडर जारी न होने के कारण लाखों युवाओं का भविष्य अधर में लटका हुआ है। द हिंदू की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन विलंबित परीक्षाओं और घूसखोरी के आरोपों ने ही युवाओं के सब्र का बांध तोड़ दिया, जिसके परिणामस्वरूप राजधानी रांची समेत राज्य के विभिन्न हिस्सों में व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। सरकार के साथ हुई वार्ता में अधिकारियों ने छात्रों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने और जल्द ही उच्च स्तरीय समिति गठित कर जांच कराने का आश्वासन दिया। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, सरकार ने मांगों पर विचार करने का वादा तो किया, लेकिन कोई ठोस समयसीमा या लिखित आश्वासन नहीं दिया। इस पर छात्र प्रतिनिधियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पूर्व में भी ऐसे आश्वासन दिए जाते रहे हैं, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं बदला। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक परीक्षा कैलेंडर जारी करने, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई और पारदर्शी चयन प्रक्रिया सुनिश्चित करने का लिखित आदेश नहीं आता, तब तक आंदोलन वापस नहीं लिया जाएगा। इस बीच, आंदोलन के दौरान रांची में हुई स्याही फेंकने की एक घटना ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। छात्र संगठन एआईएसए ने इस घटना के लिए एबीवीपी के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराया था, जिसे एबीवीपी ने सिरे से खारिज कर दिया है। द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, एबीवीपी ने इसे आंदोलन को बदनाम करने और झूठा नैरेटिव गढ़ने की साजिश करार देते हुए कहा कि उनका कोई कार्यकर्ता इसमें शामिल नहीं था। इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच आंदोलन की दिशा भटकने का खतरा भी पैदा हो गया है, हालांकि प्रमुख छात्र नेताओं ने सभी से एकजुट रहकर केवल जेपीएससी सुधार की मांग पर फोकस करने की अपील की है। कुल मिलाकर, झारखंड के युवाओं का यह संघर्ष महज एक परीक्षा का नहीं, बल्कि व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही का है। सरकार के लिए यह परीक्षा की घड़ी है कि वह आश्वासनों से आगे बढ़कर ठोस प्रशासनिक इच्छाशक्ति दिखाए। यदि समय रहते जेपीएससी की कार्यप्रणाली में आमूलचूल सुधार नहीं किए गए और परीक्षा कैलेंडर जारी नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और विकराल रूप ले सकता है, जिसका खामियाजा अंततः राज्य की शैक्षणिक व्यवस्था और युवाओं के भविष्य को भुगतना पड़ेगा।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 08 Aug 2026