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Breaking News: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का बड़ा बयान: जेन जेड के प्रदर्शनकारी देशद्रोही नहीं, उनकी शिकायतें वास्तविक
🕒 1 month ago

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने युवा पीढ़ी खासकर जेन जेड के प्रदर्शनों को लेकर एक महत्वपूर्ण और संवेदनशील बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि विरोध प्रदर्शन कर रहे युवाओं को देशद्रोही या राष्ट्रविरोधी ठहराना गलत है। भागवत के अनुसार, इन युवाओं की शिकायतें वास्तविक और जायज हैं, और उनकी आवाज को दबाने के बजाय समझने की जरूरत है। इस बयान ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है। भागवत ने अपने संबोधन में जेन जेड को पिछली पीढ़ियों से अधिक ईमानदार और स्पष्टवादी बताया। उन्होंने कहा कि ये युवा अपने अधिकारों और भविष्य को लेकर सचेत हैं और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रख रहे हैं। संघ प्रमुख ने जोर देकर कहा कि विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र में सहमति बनाने का एक सशक्त माध्यम है, न कि अराजकता फैलाने का। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा कोई व्यवसाय नहीं बल्कि मौलिक आवश्यकता है, और इस पर सकल घरेलू उत्पाद का कम से कम छह प्रतिशत खर्च किया जाना चाहिए। विभिन्न मीडिया संस्थानों की रिपोर्ट्स के अनुसार, भागवत ने छात्र आंदोलनों और युवाओं के आक्रोश के पीछे छिपे कारणों को रेखांकित किया। उन्होंने बेरोजगारी, महंगी शिक्षा और भविष्य की अनिश्चितता जैसे मुद्दों को युवाओं की वास्तविक पीड़ा बताया। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब देशभर के विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में फीस वृद्धि, नौकरियों की कमी और नीतिगत फैसलों के खिलाफ छात्र लगातार आवाज उठा रहे हैं। भागवत के इस रुख को संघ की युवा पीढ़ी के प्रति समझ और संवाद की पहल के रूप में देखा जा रहा है। इस बयान के दूरगामी सामाजिक-राजनीतिक प्रभाव हो सकते हैं। एक ओर जहां यह युवाओं के मन में विश्वास पैदा कर सकता है, वहीं दूसरी ओर यह सरकार और नीति निर्माताओं पर दबाव बढ़ाएगा कि वे युवाओं की चिंताओं को गंभीरता से लें। शिक्षा बजट बढ़ाने की मांग पहले से ही शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता करते आए हैं, लेकिन संघ प्रमुख के समर्थन से इस मांग को नई ताकत मिली है। निष्कर्षतः, मोहन भागवत का यह बयान भारतीय लोकतंत्र में युवा शक्ति की भूमिका को नई दृष्टि से देखने का आह्वान करता है। यह संदेश देता है कि असहमति और विरोध राष्ट्रवाद के विरोधी नहीं, बल्कि जीवंत लोकतंत्र के प्रतीक हैं। अब देखना होगा कि इस बयान के बाद नीति निर्माण में युवाओं की भागीदारी और उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में कितनी ठोस पहल होती है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 07 Aug 2026