संसद में परिसीमन विधेयक और एफसीआरए संशोधन को लेकर जारी गतिरोध के बीच द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए समर्थन के लिए कड़ी शर्तें रख दी हैं। पार्टी ने साफ किया है कि वह तभी इस विधेयक का साथ देगी जब दक्षिणी राज्यों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की जाए और जनसंख्या के आधार पर सीटों के बंटवारे में तमिलनाडु जैसे राज्यों को नुकसान न हो। डीएमके का यह रुख केंद्र सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभरा है क्योंकि बिना क्षेत्रीय दलों के सहयोग के इस संवेदनशील विधेयक को पारित कराना असंभव सा प्रतीत हो रहा है। इस राजनीतिक गतिरोध को तोड़ने के लिए केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच परिसीमन और एफसीआरए विधेयक के अलावा महिला आरक्षण विधेयक पर भी विस्तृत चर्चा हुई। सूत्रों के अनुसार सरकार कांग्रेस का समर्थन हासिल करने के लिए महिला आरक्षण विधेयक को आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रख रही है। रिजिजू ने बैठक के बाद कहा कि हम दुश्मन नहीं हैं और संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने के लिए सभी दलों से बातचीत जारी रखेंगे। सरकार की ओर से कांग्रेस तक पहुंच बनाने की कवायद तेज हो गई है। प्रधानमंत्री कार्यालय और गृह मंत्रालय दोनों ही स्तरों पर विपक्षी नेताओं से संपर्क साधा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हाल के दिनों में युवा पीढ़ी और छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शनों ने सरकार को अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने को मजबूर किया है। जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर उठ रही आवाजों ने केंद्र को सहमति बनाने की दिशा में धकेला है। कांग्रेस नेतृत्व ने हालांकि अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं लेकिन पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि परिसीमन जैसे संवैधानिक मुद्दे पर आम सहमति बनना आवश्यक है। राहुल गांधी ने स्पष्ट किया कि उनकी पार्टी संविधान की मूल भावना और संघीय ढांचे की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। महिला आरक्षण विधेयक पर कांग्रेस का सैद्धांतिक समर्थन जगजाहिर है लेकिन इसे परिसीमन से जोड़कर देखने पर पार्टी सतर्कता बरत रही है। आने वाले दिनों में संसद का सत्र इन मुद्दों पर निर्णायक साबित हो सकता है। डीएमके की शर्तों, कांग्रेस की रणनीति और सरकार की पहल के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं होगा। राजनीतिक दलों को दलगत हितों से ऊपर उठकर राष्ट्रीय हित में फैसला लेना होगा ताकि परिसीमन की प्रक्रिया न्यायपूर्ण, पारदर्शी और संघीय भावना के अनुरूप संपन्न हो सके।