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Breaking News: लोकसभा में पेपर लीक रोधी विधेयक पर गरमाई बहस, भाजपा सांसद ने कहा 'मोदीजी क्लॉक्ड इट' तो विपक्ष ने बताया 'शोपीस'
🕒 1 hour ago

लोकसभा में सोमवार को सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक 2024 पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। इस विधेयक को जहां सरकार ने 'ऐतिहासिक कानून' बताकर छात्रों के भविष्य की रक्षा करने वाला कदम करार दिया, वहीं विपक्ष ने इसे महज 'दिखावा' और 'मूल मुद्दों से ध्यान भटकाने वाला' बताया। चर्चा का सबसे दिलचस्प क्षण तब आया जब भाजपा के एक युवा सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा में जेन-जेड शैली का प्रयोग करते हुए कहा, "मोदीजी क्लॉक्ड इट" - जिसका अर्थ होता है कि प्रधानमंत्री ने बिल्कुल सही समय पर सही कदम उठाया है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने विधेयक पेश करते हुए कहा कि यह कानून पेपर लीक जैसी गंभीर समस्या से निपटने के लिए कड़े प्रावधान करता है। इसमें संगठित गिरोहों द्वारा परीक्षा पत्र लीक करने पर 10 साल तक की कैद और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही, परीक्षा केंद्रों पर नकल कराने वालों की संपत्ति जब्त करने का भी अधिकार दिया गया है। प्रधान ने दावा किया कि यह विधेयक युवाओं के सपनों को साकार करने और परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बहाल करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। वहीं, विपक्ष के नेताओं ने विधेयक की खामियां गिनाते हुए सरकार को घेरा। कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने तीखे शब्दों में पूछा, "पेलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया था?" और इस विधेयक को 'शोपीस' करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मूल समस्याओं - जैसे परीक्षा एजेंसियों में भ्रष्टाचार, प्रश्न पत्र तैयार करने की गोपनीय प्रक्रिया में सेंध, और बड़े अधिकारियों की मिलीभगत - पर चुप्पी साधे हुए है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) ने भी बयान जारी कर कहा कि यह संशोधन विधेयक मूलभूत मुद्दों को संबोधित नहीं करता और केवल सतही उपाय है। विधेयक के प्रमुख प्रावधानों में ऑनलाइन परीक्षाओं में धोखाधड़ी रोकने के लिए तकनीकी ढांचा मजबूत करना, राष्ट्रीय स्तर पर एक उच्चाधिकार प्राप्त समिति का गठन करना, और दोषियों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतें स्थापित करना शामिल है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि कानून कितना भी कड़ा हो, जब तक कार्यान्वयन एजेंसियों की जवाबदेही सुनिश्चित नहीं होती और भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं, तब तक पेपर लीक की घटनाएं रुकना मुश्किल है। चर्चा के अंत में यह स्पष्ट हुआ कि पेपर लीक जैसी सामाजिक बुराई से निपटने के लिए केवल कानून बनाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति, प्रशासनिक सुधार, तकनीकी उन्नयन और सबसे बढ़कर नैतिक मूल्यों की स्थापना जरूरी है। युवाओं का विश्वास जीतने के लिए सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि यह विधेयक कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि जमीनी स्तर पर इसका असर दिखे। तभी "मोदीजी क्लॉक्ड इट" जैसे नारे वास्तविकता के धरातल पर उतर सकेंगे।

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✍️ By Pradeep Yadav | 28 Jul 2026