जापान के दक्षिणी क्षेत्र में शुक्रवार को आए 7.1 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। भूकंप का केंद्र क्यूशू द्वीप के निकट समुद्र तल में स्थित था, जिसके कारण तटीय इलाकों में सुनामी की चेतावनी जारी की गई है। प्रधानमंत्री ताकाइची ने तत्काल एक उच्चस्तरीय टास्क फोर्स का गठन किया है जो नुकसान का आकलन करेगी और बचाव अभियानों का समन्वय करेगी। मौसम विभाग ने अगले कुछ घंटों में एक मीटर तक की लहरें उठने की आशंका जताई है, जिससे तटवर्ती निवासियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने का आदेश दिया गया है। भूकंप के झटके इतने तेज थे कि कई इमारतें ढह गईं, पुल क्षतिग्रस्त हुए और बिजली आपूर्ति ठप हो गई। सबसे गंभीर स्थिति एक बड़े शॉपिंग मॉल में बनी हुई है जहां अग्निशमन विभाग के अनुसार 'कई लोग' अंदर फंसे हुए हैं। बचाव दल मलबे में दबे लोगों तक पहुंचने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं। अब तक कम से कम 50 लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है, जिनमें कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। अस्पतालों को अलर्ट पर रखा गया है और अतिरिक्त चिकित्सा दल तैनात किए गए हैं। प्रधानमंत्री ताकाइची ने आपातकालीन बैठक में कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता जान-माल की रक्षा करना है। टास्क फोर्स में रक्षा मंत्रालय, मौसम एजेंसी, पुलिस और अग्निशमन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। उन्होंने नागरिकों से शांति बनाए रखने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। परमाणु ऊर्जा संयंत्रों की सुरक्षा जांच भी शुरू कर दी गई है, हालांकि फिलहाल किसी विकिरण रिसाव की सूचना नहीं है। परिवहन सेवाएं बाधित हुई हैं और कई उड़ानें रद्द की गई हैं। जापान भूकंप की दृष्टि से विश्व के सबसे संवेदनशील क्षेत्रों में आता है और यहां की इमारतें झटके सहने के लिए डिज़ाइन की जाती हैं, फिर भी 7.1 तीव्रता का झटका भारी पड़ सकता है। 2011 के फुकुशिमा त्रासदी की यादें ताज़ा हैं, जिससे प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने सहायता की पेशकश की है। आने वाले घंटे बचाव कार्यों के लिए निर्णायक होंगे, जबकि भूकंप के बाद के झटके (आफ्टरशॉक्स) जारी रहने की आशंका है।