कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी पर बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें 'बलात्कारियों का पैरोकार' करार दिया है। संसद भवन परिसर में मीडिया से बातचीत के दौरान राहुल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसे व्यक्ति को शिक्षा मंत्री बनाया है जिसने अतीत में बलात्कार के आरोपियों का बचाव किया था। इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में भूचाल आ गया है और सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई है। कांग्रेस का आरोप है कि जोशी ने वकील रहते हुए कुछ विवादित मामलों में आरोपियों की पैरवी की थी, जिसे अब मुद्दा बनाया जा रहा है। इस पूरे प्रकरण पर पलटवार करते हुए प्रल्हाद जोशी ने राहुल गांधी के आरोपों को बेबुनियाद और राजनीति से प्रेरित बताया है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि उनके पास कोई सबूत है तो उसे प्रमाणित करके दिखाएं। जोशी ने स्पष्ट किया कि एक वकील के तौर पर उनका कर्तव्य मुवक्किल की पैरवी करना होता है और इसे किसी की विचारधारा या चरित्र से जोड़ना गलत है। भारतीय जनता पार्टी के अन्य नेताओं ने भी कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा कि विपक्ष अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए व्यक्तिगत हमलों पर उतर आया है। संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे को लेकर हंगामे के आसार बन रहे हैं। इसी कड़ी में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी मोर्चा खोलते हुए आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रोफेसर वी कामकोटि पर निशाना साधा है। उन्होंने परीक्षा सुधार पैनल में शामिल किए गए निदेशक को 'गौमूत्र विशेषज्ञ' बताकर उनकी योग्यता पर सवाल उठाए। प्रियंका ने कहा कि शिक्षा जैसे गंभीर मंत्रालय में वैज्ञानिक सोच के बजाय अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले लोगों को जगह दी जा रही है। इसके अलावा लोकसभा में बिलकिस बानो मामले पर भी जबरदस्त टकराव देखने को मिला, जहां विपक्ष ने दोषियों की रिहाई और सरकार की चुप्पी पर कड़े सवाल दागे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये आरोप-प्रत्यारोप आने वाले दिनों में और तेज होंगे। शिक्षा मंत्री की नियुक्ति को लेकर उठे सवालों ने सरकार की मंशा पर विपक्ष को हमलावर होने का मौका दे दिया है। वहीं, सरकार और भाजपा इसे कांग्रेस की हताशा बता रही है। संसद का वर्तमान सत्र इन विवादों की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है, क्योंकि दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं। जनता के असल मुद्दे जैसे महंगाई, बेरोजगारी और शिक्षा व्यवस्था की खामियां इन राजनीतिक लड़ाइयों के पीछे धकेल दी गई हैं। निष्कर्षतः, राहुल गांधी के 'बलात्कारियों के पैरोकार' वाले बयान ने भारतीय राजनीति में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। जहां एक ओर कांग्रेस इसे नैतिकता और संवैधानिक मूल्यों की लड़ाई बता रही है, वहीं भाजपा इसे ओछी राजनीति करार दे रही है। प्रियंका गांधी के आईआईटी निदेशक पर हमले और बिलकिस बानो मामले पर संसदीय टकराव ने माहौल को और गरमा दिया है। देखना होगा कि क्या इस आरोप-प्रत्यारोप के बीच संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चल पाएगी या फिर गतिरोध बरकरार रहेगा।