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Breaking News: संसद मानसून सत्र: पेपर लीक रोधी विधेयक पेश, हंगामे के बीच लोकसभा 5 बजे तक स्थगित
🕒 1 hour ago

संसद के मानसून सत्र के छठे दिन सोमवार को लोकसभा में पेपर लीक की बढ़ती घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए सरकार ने कड़ा विधेयक पेश किया, लेकिन विपक्ष के हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही अपराह्न पांच बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विभिन्न दलों के नेताओं से इस महत्वपूर्ण विधेयक पर सर्वसम्मति बनाने का आग्रह किया, वहीं राज्यसभा की बैठक भी शाम 5 बजकर 15 मिनट पर बुलाई गई है। देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाओं से आक्रोशित युवाओं के राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों के दबाव में सरकार ने यह विधेयक आनन-फानन में सदन के पटल पर रखा। केंद्रीय कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) विधेयक, 2024' पेश करते हुए कहा कि इस कानून का उद्देश्य संगठित गिरोहों, कोचिंग संस्थानों और तकनीकी माध्यमों से होने वाली धांधली को पूरी तरह समाप्त करना है। विधेयक में दोषियों के लिए अधिकतम 10 वर्ष की सजा और एक करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। साथ ही, परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय करते हुए उनकी संपत्ति जब्त करने का भी अधिकार दिया गया है। सरकार का तर्क है कि मौजूदा कानून कमजोर हैं और नए प्रावधानों से नकल माफिया की कमर टूटेगी। विधेयक पेश होते ही विपक्षी दलों ने इस पर गहन चर्चा की मांग करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और द्रमुक सहित कई दलों के सांसद अध्यक्ष के आसन के समक्ष आकर नारेबाजी करने लगे। उनका आरोप था कि सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर जल्दबाजी दिखा रही है और विधेयक को संसदीय समिति के पास भेजे बिना पारित कराना चाहती है। विपक्ष ने पेपर लीक के हालिया मामलों में कथित तौर पर भाजपा शासित राज्यों के नेताओं और अधिकारियों की संलिप्तता का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री से बयान की मांग की। हंगामा बढ़ता देख अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन को अपराह्न पांच बजे तक स्थगित कर दिया और सर्वदलीय बैठक बुलाकर सहमति बनाने का प्रयास किया। भाजपा ने विपक्ष के रवैये को युवा विरोधी करार देते हुए पलटवार किया। संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि विपक्ष नहीं चाहता कि पेपर लीक रोकने के लिए कड़ा कानून बने, क्योंकि इससे उनके शासित राज्यों में चल रहे नकल उद्योग पर चोट पहुंचेगी। उन्होंने दावा किया कि यह विधेयक छात्रों के भविष्य की रक्षा के लिए ऐतिहासिक कदम है और विपक्ष को राजनीति छोड़कर इसमें सहयोग करना चाहिए। वहीं, सरकारी सूत्रों का कहना है कि यदि विपक्ष सहमत नहीं हुआ तो सरकार इस विधेयक को पारित कराने के लिए मतविभाजन का रास्ता अपना सकती है। अब सबकी निगाहें अपराह्न पांच बजे होने वाली लोकसभा की बैठक पर टिकी हैं। अध्यक्ष बिरला द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में यदि सहमति बन जाती है तो विधेयक पर सार्थक चर्चा के बाद इसे पारित कराया जा सकेगा। अन्यथा, गतिरोध जारी रहने पर संसद का कीमती समय बर्बाद होगा और लाखों प्रतियोगी छात्रों को निराशा हाथ लगेगी। यह विधेयक न केवल परीक्षा प्रणाली की पवित्रता बहाल करने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो सकता है, बल्कि यह सरकार की युवा हितैषी छवि को भी मजबूत करेगा। विपक्ष के लिए भी यह अवसर है कि वह रचनात्मक सुझाव देकर कानून को और प्रभावी बनाने में योगदान दे।

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✍️ By Pradeep Yadav | 27 Jul 2026