📰 Kotputli News
Breaking News: सीजेपी की केंद्र को चेतावनी: छात्रों की गिरफ्तारी और एफआईआर वापस न ली तो फिर करेंगे आंदोलन
🕒 1 hour ago

सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) ने केंद्र सरकार को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर बिहार और पश्चिम बंगाल में गिरफ्तार किए गए छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो संगठन को फिर से आंदोलन पर बैठने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। सीजेपी ने सरकार को एक समयसीमा दी है और स्पष्ट किया है कि यदि इस अवधि में छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द नहीं की गईं तो कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब दोनों राज्यों में छात्रों की गिरफ्तारी और उनके उत्पीड़न के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। सीजेपी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि बिहार और पश्चिम बंगाल में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों को निशाना बनाया जा रहा है। संगठन के अनुसार, इन राज्यों की पुलिस ने छात्रों को न केवल गिरफ्तार किया बल्कि उनके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमे दर्ज किए हैं। सीजेपी ने आरोप लगाया कि गिरफ्तार छात्रों को प्रताड़ित किया जा रहा है और उनके मानवाधिकारों का उल्लंघन हो रहा है। संगठन ने केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि यह संवैधानिक अधिकारों पर सीधा हमला है और इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। सीजेपी ने सरकार को याद दिलाया कि पूर्व में दिए गए आश्वासनों के बावजूद छात्रों पर दर्ज मुकदमे वापस नहीं लिए गए हैं। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार से कई बार संवाद करने का प्रयास किया लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। अब सीजेपी ने एक निश्चित समयसीमा तय की है और चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वे न केवल सड़कों पर उतरेंगे बल्कि अदालत का दरवाजा भी खटखटाएंगे। संगठन ने स्पष्ट किया कि यह चेतावनी नहीं बल्कि संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए अंतिम प्रयास है। इस पूरे मामले पर राजनीतिक दलों और नागरिक समाज संगठनों की प्रतिक्रियाएं भी आने लगी हैं। कई विपक्षी दलों ने सीजेपी की मांग का समर्थन करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। वहीं, मानवाधिकार संगठनों ने भी गिरफ्तार छात्रों की रिहाई और मुकदमे वापस लेने की मांग तेज कर दी है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर गंभीर धाराएं लगाना संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन है। सीजेपी की इस चेतावनी ने एक बार फिर छात्र अधिकारों और राज्य की दमनकारी नीतियों पर बहस को तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि केंद्र सरकार इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है और क्या सीजेपी को दी गई समयसीमा के भीतर कोई सकारात्मक कदम उठाया जाता है। यदि सरकार चेतावनी को नजरअंदाज करती है तो देश के विभिन्न हिस्सों में फिर से छात्र आंदोलन की शुरुआत हो सकती है, जिसका असर शैक्षणिक माहौल और कानून-व्यवस्था पर पड़ना तय है।

Stay connected with Kotputli News for latest updates.


📲 Share on WhatsApp
✍️ By Pradeep Yadav | 27 Jul 2026