पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के संसद पहुंचने पर सत्तापक्ष के सांसदों ने 'धर्मेंद्र प्रधान जिंदाबाद' के नारों के साथ उनका जोरदार स्वागत किया, जिससे विपक्षी खेमे में नाराजगी देखी गई। प्रधान ने अपने कार्यकाल को 'जंतर-मंतर से आगे' बताते हुए नई शिक्षा नीति के क्रियान्वयन, डिजिटल शिक्षा के विस्तार और कौशल विकास में हुई प्रगति को अपनी प्रमुख उपलब्धियां गिनाईं। हालांकि, विपक्ष ने उनके कार्यकाल को विवादों से भरा बताते हुए पेपर लीक, NEET-UG परीक्षा में अनियमितता और विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों को लेकर सवाल खड़े किए। संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह प्रधान ने आक्रामक रुख अपनाते हुए खुद को 'स्ट्रीट फाइटर' घोषित किया और कांग्रेस सांसदों के आरोपों का तीखा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वे सड़क से संसद तक की लड़ाई लड़ने वाले कार्यकर्ता हैं और विपक्ष के दबाव में नहीं झुकेंगे। इस दौरान उनके समर्थकों ने उन्हें जननेता बताते हुए उनके संघर्ष की सराहना की, जबकि आलोचकों ने इसे सत्ता का अहंकार करार दिया। द वायर जैसे मीडिया संस्थानों ने तो यहां तक लिखा कि 'प्रधान की बलि देकर मोदी सरकार नहीं बच सकती', जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म है। मंत्रिमंडल फेरबदल में प्रधान को शिक्षा मंत्रालय से हटाकर वरिष्ठ नेता प्रल्हाद जोशी को नया शिक्षा मंत्री बनाया गया है। जोशी ने पदभार संभालते ही इसे 'कार्य का नया क्षेत्र' बताते हुए नई शिक्षा नीति को गति देने, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाने और युवाओं के रोजगारपरक कौशल विकास पर जोर देने की बात कही। टेलीग्राफ की रिपोर्ट के अनुसार, जोशी के सामने सबसे बड़ी चुनौती NEET और UGC-NET जैसी परीक्षाओं में विश्वास बहाली के साथ-साथ राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करना होगा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि प्रधान को हटाने का फैसला हालिया परीक्षा विवादों से उपजे युवाओं के आक्रोश को शांत करने की रणनीति का हिस्सा है। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि यह महज दिखावटी बदलाव है और नीतिगत स्तर पर कोई परिवर्तन नहीं होगा। कांग्रेस ने कहा कि जब तक जवाबदेही तय नहीं होती, केवल चेहरा बदलने से व्यवस्था नहीं सुधरेगी। संसद के मौजूदा सत्र में शिक्षा मंत्रालय के कामकाज पर तीखी बहस होने के आसार हैं। निष्कर्षतः, धर्मेंद्र प्रधान का कार्यकाल उपलब्धियों और विवादों का मिश्रण रहा, जिसका अंत नाटकीय अंदाज में हुआ। नए मंत्री प्रल्हाद जोशी के कंधों पर अब युवाओं का विश्वास जीतने और शिक्षा तंत्र को दुरुस्त करने की दोहरी जिम्मेदारी है। आने वाले दिन बताएंगे कि क्या यह बदलाव वास्तविक सुधार लाएगा या फिर सियासी शतरंज की एक चाल मात्र साबित होगा।