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Breaking News: जुलाई में बधिर वर्षा, एल नीनो की कड़ी पकड़: मौसम विभाग की चेतावनी
🕒 1 hour ago

भारतीय मौसम विभाग ने हाल ही में जुलाई के महीने के लिए अपनी विस्तृत भविष्यवाणी जारी की है, जिसमें उसने इस बात की चेतावनी दी है कि इस वर्ष का वार्षिक वर्षा मानक से नीचे रह सकती है। विभाग ने बताया कि एल नीनो की तीव्रता इस बार पहले से अधिक बने रहने की संभावना है, जिससे मानसून पर इसका दबाव और भी बढ़ जाएगा। एल नीनो, जो प्रशांत समुद्र के जल तापमान में अनियमित वृद्धि के कारण उत्पन्न होता है, इस वर्ष की मौसम प्रणाली को अस्थिर कर रहा है और इससे भारतीय उपमहाद्वीप में जलवायु संबंधी कई असंगतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं। इस जोखिम को देखते हुए, मौसम विभाग ने किसानों, जलप्रबंधन अधिकारियों और प्रदेशीय सरकारों को सतर्क रहने और आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। वर्षा मानकों में गिरावट के प्रमुख कारणों में समुद्र सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि, वायुमंडलीय दबाव में परिवर्तन और उष्णकटिबंधीय वर्षा मंडल की अस्थिरता शामिल हैं। पिछले कई हफ्तों में पश्चिमी ज्ञाति में धुंधले बादल और अपर्याप्त वृष्टिपात देखा गया है, जबकि पूर्वी तट के कुछ हिस्सों में भी अत्यधिक गर्मी और सूखे की स्थितियाँ उत्पन्न हो रही हैं। इन संकेतों को देखते हुए, मौसम विभाग ने राष्ट्रीय स्तर पर जल भंडारण, तालाब और नहरों की स्थिति का विशेष निरीक्षण करने का आदेश दिया है, ताकि संभावित जलसंकट को रोका जा सके। केंद्र ने एल नीनो के प्रभाव को कम करने के लिए एक विशेष आपातकालीन योजना तैयार की है, जिसमें बारह जल संविदा वाले राज्य-प्रांतों को प्राथमिकता दी जा रही है। यह योजना जलसंधारण, सिंचाई के वैकल्पिक तरीकों और बिनाबूंद जलस्रोतों के उपयोग को प्रेरित करती है। साथ ही, किसानों को सूखे-रोधी फसलों की दिशा में प्रेरित करने के लिए वित्तीय सहायता और बीज समर्थन प्रदान करने का भी प्रावधान किया गया है। कई राज्य सरकारें पहले ही इस दिशा में कार्यवाही कर रही हैं, जैसे कि धान, कपास और सोयाबीन की बुआई को रोकना और अधिक जल-संवेदनशील फसलों की ओर रुख करना। विज्ञानियों का मानना है कि यदि जुलाई के दौरान वर्षा में उल्लेखनीय कमी आती है, तो यह पूरे वर्ष की जल उपलब्धता पर गहरा असर डालेगी। इससे न केवल कृषि उत्पादकता में गिरावट आएगी, बल्कि जल संसाधनों की कमी के कारण शहरी क्षेत्रों में भी पानी की तंगी बढ़ सकती है। इस कारण, जल संरक्षण के उपायों को बढ़ावा देना और सार्वजनिक जागरूकता कार्यक्रमों का संचालन बेहद आवश्यक हो गया है। अंत में, मौसम विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे मौसम के संकेतों पर ध्यान दें, जल की बचत करें और किसी भी संभावित आपदा के लिए तैयार रहें।

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✍️ By Pradeep Yadav | 01 Jul 2026