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Breaking News: भारी पेड़ गिरने से खून-ख़राब, मां बटन पकड़ कर बैठी: 11‑साल के बेटे की मौत का दर्दनाक दृश्य
🕒 1 hour ago

मुंबई के चेन्म्बौर में एक साधारण स्कूल बस पर चल रहे बच्चों का दिन अचानक त्रासदी में बदल गया। सुबह के समय बस बायां मोड़ ले रही थी, तभी एक बड़े और बंजारक पेड़ की टहनी अचानक टूट कर बस के छत पर आ गिर पड़ी। उस घातक टकराव में एक 11 साल का छात्र पूरी तरह से दब गया और गंभीर चोटों के कारण कई मिनटों के भीतर ही उसकी जिंदगी समाप्त हो गई। इस भयावह दुर्घटना में चार बच्चे घायल हुए, और कई साक्षी इस शॉकिंग दृश्य के गवाह बने। तुरंत घटना स्थल पर पहुंची माँ को देखते ही वह अपने बेटे की जीवित रहन‑सहन की आशा में लोटे‑प्रोटे नहीं कर पा रही थी। उसने एक बटन (बेसबॉल बैट) कस कर पकड़ा और पेड़ के टूटे हुए हिस्सों के बीच बैठ गई, जैसे वह किसी अनिर्णीत शक्ति को रोकने की कोशिश कर रही हो। उसकी आँखों में आँसू की धारा बह रही थी और उसने बार‑बार कहा, "उसको खेलना है, उसे जाना ही पड़ेगा," जबकि वह अपने नन्हे बेटे को फिर से जीवित रखने की असहाय कोशिश कर रही थी। आपूर्ति सेवाओं को तुरंत बुलाया गया, एम्बुलेंस और आपातकालीन चिकित्सकों ने घायलों को अस्पताल ले जाने के लिए धुंधली सड़कों पर दोड़ लगाई। घायल बच्चों को तत्काल बुख़ार और हड्डी टूटने की गंभीर चोटें लगी थीं, जबकि शोकाकुल परिवारों ने इस अनजाने आपदा को सहन करने की कोशिश की। पुलिस ने बताया कि पेड़ की जड़ें कमजोर थीं और बरसात के मौसम में जलवायु की अस्थिरता के कारण टहनी अचानक गिर गई। इस घटना के बाद स्थानीय निकाय ने सभी स्कूल बसों की सड़कों और बुनियादी ढांचों का निरीक्षण करने का आदेश दिया है। समुदाय में इस घटना ने गहरा शोक उत्पन्न किया है। कई नागरिकों ने मां की हिम्मत की सराहना की और राहत के तौर पर दान, फूलों की मलबे और सान्त्वना की बातें प्रकट कीं। वहीं शिक्षा विभाग ने कहा कि ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए स्कूल बसों के साथ नियमित सुरक्षा जाँच, पेड़ों की विशेषज्ञता से छंटाई और यदि आवश्यक हो तो अनिवार्य परिवर्तन किया जाएगा। अंत में यह दुखद घटना यह याद दिलाती है कि प्राकृतिक आपदाएँ अक्सर अप्रत्याशित रूप से हमारे जीवन में घुस आती हैं और हमारी सुरक्षा के लिये सतर्कता और पेशेवर देखरेख अनिवार्य है। एक मां का बटन से थामा हाथ न केवल उसके गहरे शोक का प्रतीक है बल्कि यह भी दर्शाता है कि मानवीय भावनाएँ जब दर्द के आगे झुकती हैं तो एक अडिग शक्ति बन जाती हैं। इस त्रासदी से सीख लेते हुए, सभी संबंधित पक्षों को मिलकर ऐसी अनहोनी को फिर से न दोहराने का संकल्प लेना चाहिए।

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✍️ By Pradeep Yadav | 30 Jun 2026