भ्रात्रता से भरे इस माहौल में अफ़ग़ानिस्तान के तालीबान सरकार ने पाकिस्तान की सीमा पर अचानक हवाई और स्थल हमले शुरू कर दिए, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव का स्तर आसमान छू गया है। इस कदम के पीछे कई जटिल कारण छिपे हुए हैं, लेकिन सबसे प्रमुख कारण सीमा पर बढ़ते आतंकवादी संगठनों के क़ाबू को तोड़ना बताया जा रहा है। तालीबान के अधिकारियों ने कहा कि उन्होंने अपने राष्ट्रीय हित और नागरिकों की सुरक्षा को देखते हुए इस कार्रवाई को अंजाम दिया है। तीन प्रमुख हमलों में सबसे बड़ा हमला सीमा के पश्चिमी इलाक़े में किया गया, जहाँ तालीबान की वायु सेना ने पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में स्थित कई इस्लामिक राज्य (आईएसआईएस) की ठहरावस्थलियों को निशाना बनाया। इन ठहरावस्थलियों को नष्ट करने के बाद, तालीबानी सेना ने उस क्षेत्र में मौजूद आतंकवादी बड़ों को हत्यारा घोषित कर दिया। इस कार्रवाई के परिणामस्वरूप कई उग्रवादी ठहरावस्थल नष्ट हुए और कई आतंकवादी अफ़ग़ान सुरक्षा बलों द्वारा मारेज़ हुए। पाकिस्तान ने भी इस हमले की कड़ाई से निंदा की और कहा कि वह अपनी सीमाओं की सुरक्षा के लिए आवश्यक सभी कदम उठाएगा। इस प्रतिक्रिया में पाकिस्तान की वायु सेना ने फिर से कुछ हवाई हमले कर सीमा के अन्य हिस्सों में स्थित संभावित खतरों को हटाने का दावा किया। दोनों देशों के बीच इस प्रकार का परस्पर-विद्रोह पहले भी देखा गया था, लेकिन अब यह एक अधिक व्यापक और संगठित रूप ले रहा है। अंत में यह कहा जा सकता है कि इस संघर्ष के मूल में दो मुख्य कारक हैं: एक तो दक्षिण एशिया में बढ़ता आतंकवाद, और दूसरा है दोनों देशों के बीच राजनीतिक असंतोष। तालीबान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह किसी भी प्रकार के आतंकवाद को सहन नहीं करेगा और भविष्य में भी ऐसी ही कार्रवाई करता रहेगा। इस स्थिति में क्षेत्रीय स्थिरता के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय का शीघ्र हस्तक्षेप आवश्यक प्रतीत होता है, ताकि दोनों देशों के बीच संवाद स्थापित हो और शांति की दिशा में कदम बढ़ाया जा सके।