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Breaking News: जर्मनी में धुर दक्षिणपंथी एएफडी की ऐतिहासिक जीत: क्या राष्ट्रीय सत्ता की ओर बढ़ रही है पार्टी?
🕒 4 hours ago

जर्मनी के पूर्वी राज्य थुरिंगिया में धुर दक्षिणपंथी पार्टी 'अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी' (एएफडी) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, जिससे देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद पहली बार कोई धुर दक्षिणपंथी दल किसी जर्मन राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरा है। एएफडी ने लगभग 33 प्रतिशत मतों के साथ क्रिश्चियन डेमोक्रेटिक यूनियन (सीडीयू) को पीछे छोड़ दिया है। इस परिणाम ने न केवल जर्मनी बल्कि पूरे यूरोप में चिंता की लहर दौड़ा दी है, क्योंकि यह राष्ट्रवादी और प्रवासी-विरोधी राजनीति के बढ़ते प्रभाव का स्पष्ट संकेत है। चांसलर ओलाफ शोल्त्स और मुख्यधारा के दलों ने इस परिणाम को 'लोकतंत्र के लिए खतरा' बताया है, जबकि एएफडी नेता ब्योर्न होके ने इसे 'इतिहास का मोड़' करार दिया। थुरिंगिया के अलावा सैक्सनी और ब्रांडेनबर्ग में भी एएफडी मजबूत स्थिति में है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई, ऊर्जा संकट और प्रवासन नीति से जनता का मोहभंग मुख्यधारा के दलों से हुआ है, जिसका फायदा एएफडी को मिल रहा है। यूरोपीय संघ के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यह जीत यूरोप में राष्ट्रवादी लहर को और बल दे सकती है। इस जीत के अंतरराष्ट्रीय प्रभाव भी गहरे हैं। रूस ने जहां इस परिणाम का स्वागत किया है, वहीं अमेरिका और नाटो सहयोगी चिंतित हैं कि एएफडी की यूक्रेन विरोधी और रूस समर्थक नीतियां पश्चिमी एकता को कमजोर कर सकती हैं। पार्टी की नीतियों में यूरोपीय संघ से निकलना, नाटो सदस्यता की समीक्षा और प्रवासन पर पूर्ण प्रतिबंध शामिल हैं। हालांकि, अन्य दलों ने एएफडी के साथ गठबंधन न करने का 'फायरवॉल' बनाए रखा है, जिससे सरकार गठन में मुश्किल आ सकती है। जर्मनी की घरेलू राजनीति पर इसका असर पहले से दिखने लगा है। चांसलर शोल्त्स की गठबंधन सरकार पहले ही आंतरिक मतभेदों से जूझ रही है, और यह हार उनकी स्थिति को और कमजोर करेगी। विपक्षी सीडीयू/सीएसयू भी दबाव में है कि वह एएफडी के मुद्दों को अपनाए या स्पष्ट विकल्प पेश करे। संवैधानिक संरक्षण एजेंसी पहले से एएफडी के कुछ धड़ों को 'चरमपंथी' मानती है, जिससे पार्टी पर प्रतिबंध की मांग भी जोर पकड़ सकती है। निष्कर्षतः, थुरिंगिया में एएफडी की जीत जर्मनी के लिए एक निर्णायक क्षण है। यह लोकतांत्रिक संस्थाओं की मजबूती और मुख्यधारा के दलों की जनता से जुड़ने की क्षमता की परीक्षा है। अगर स्थापित दल जनता की वास्तविक चिंताओं - महंगाई, आवास, ऊर्जा सुरक्षा - का प्रभावी समाधान नहीं ढूंढ पाते, तो धुर दक्षिणपंथ का उभार रोकना मुश्किल होगा। आने वाले महीनों में जर्मनी की राजनीतिक दिशा तय करेगी कि यह जीत एक अपवाद थी या एक नए युग की शुरुआत।

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✍️ By Pradeep Yadav | 07 Sep 2026