राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित सत्य निकेतन इलाके में सोमवार को एक बड़ा हादसा हुआ जब एक बहुमंजिला छात्रावास इमारत अचानक भरभराकर ढह गई। इस इमारत में ज्यादातर छात्र बतौर पेइंग गेस्ट (पीजी) रहते थे। हादसे की सूचना मिलते ही राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), दिल्ली दमकल सेवा और स्थानीय पुलिस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं और युद्धस्तर पर बचाव अभियान शुरू कर दिया। अब तक मलबे से छह छात्रों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जिन्हें इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, आशंका जताई जा रही है कि अभी भी कई छात्र मलबे के नीचे दबे हो सकते हैं, जिन्हें निकालने के लिए बचावकर्मी कड़ी मशक्कत कर रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार, इमारत काफी पुरानी थी और उसकी मरम्मत का काम चल रहा था। हादसे के वक्त इमारत के अंदर मौजूद कुछ छात्रों ने अपने मोबाइल फोन से परिजनों और दोस्तों को कॉल कर मदद की गुहार लगाई, जिसके बाद प्रशासन हरकत में आया। बचाव दल ड्रोन और खोजी कुत्तों की मदद से मलबे में दबे लोगों का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। इलाके की संकरी गलियों के कारण भारी मशीनरी पहुंचाने में दिक्कत आ रही है, जिसके चलते मैन्युअल तरीके से मलबा हटाया जा रहा है। दिल्ली सरकार ने घटना की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए हैं और इमारत के मालिक के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज करने की तैयारी है। इस दर्दनाक हादसे पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने घटना पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि 'हर छात्र की जिंदगी अनमोल है' और उन्होंने छात्रों के आवास संकट को उजागर करते हुए सुरक्षित आवास सुनिश्चित करने की मांग की। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और शीर्ष अधिकारियों से बात कर बचाव कार्यों का जायजा लिया और हरसंभव केंद्रीय सहायता का आश्वासन दिया। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने भी घटनास्थल का दौरा कर हालात का जायजा लिया और पीड़ित परिवारों को हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। बचाव अभियान अभी भी जारी है और प्रशासन की प्राथमिकता मलबे में फंसे हर व्यक्ति को सुरक्षित निकालना है। डॉक्टरों की टीमें मौके पर तैनात हैं ताकि निकाले गए लोगों को तुरंत चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई जा सके। इस हादसे ने एक बार फिर पुरानी इमारतों की सुरक्षा ऑडिट और छात्रों के लिए सुरक्षित आवास व्यवस्था की जरूरत को रेखांकित किया है। स्थानीय निवासी और छात्र संगठन मांग कर रहे हैं कि ऐसी लापरवाही बरतने वाले भवन मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए कड़े नियम बनाए जाएं। रात गहराने के साथ बचाव कार्य और चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है, लेकिन बचाव दलों का हौसला बुलंद है। प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं ताकि परिजन अपने प्रियजनों की जानकारी ले सकें। इस हृदयविदारक घटना ने पूरी दिल्ली को झकझोर कर रख दिया है और हर कोई दुआ कर रहा है कि मलबे में फंसे सभी लोग सकुशल बाहर आ जाएं। सरकार और प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया सराहनीय है, लेकिन असली परीक्षा अब हर जिंदगी को बचाने की है।