अमेरिकी सेना ने ईरान के तीन तेल टैंकरों पर सटीक हमला करते हुए उन्हें 'स्थायी रूप से निष्क्रिय' कर दिया है और इसका वीडियो भी जारी किया है। इस कार्रवाई के पीछे अमेरिका ने तर्क दिया है कि ईरान ने उसके नौसैनिक युद्धपोतों को निशाना बनाया था, जिसके जवाब में यह प्रतिरोधात्मक कदम उठाया गया है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ईरान अमेरिकी नौसेना पर हमला करता है तो उसके तेल टैंकरों को डुबो दिया जाएगा। इस घटनाक्रम से खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर पहुंच गया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय स्थिति पर नजर रखे हुए है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, अमेरिकी बलों ने होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट ईरानी तेल टैंकरों पर समन्वित हमला किया। पेंटागन द्वारा जारी फुटेज में दिखाया गया है कि मिसाइल हमले के बाद टैंकरों में भीषण आग लग गई और वे पूरी तरह से निष्क्रिय हो गए। अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि ये टैंकर ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स द्वारा संचालित थे और क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक गतिविधियों के लिए खतरा पैदा कर रहे थे। ईरान ने अभी तक आधिकारिक तौर पर नुकसान की पुष्टि नहीं की है, लेकिन उसके सरकारी मीडिया ने अमेरिकी आक्रामकता की निंदा की है। अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने एक कड़े बयान में कहा, "हम ईरान को स्पष्ट संदेश देना चाहते हैं: यदि आप हमारे जहाजों या कर्मियों पर हमला करेंगे, तो हम आपके तेल निर्यात को पूरी तरह से रोक देंगे।" इस नीति को 'अधिकतम दबाव' अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है। हेगसेथ ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका क्षेत्र में संघर्ष नहीं चाहता, लेकिन अपनी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। इस चेतावनी को ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रॉक्सी बलों के खिलाफ अमेरिकी रणनीति के विस्तार के रूप में देखा जा रहा है। इस बीच, ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी अमेरिकी युद्धपोतों पर मिसाइल और ड्रोन हमले करने का दावा किया है, जिससे दोनों पक्षों के बीच सीधी सैन्य झड़प की आशंका बढ़ गई है। अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में तेल टैंकरों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से विश्व का लगभग 20% तेल गुजरता है। संयुक्त राष्ट्र और प्रमुख वैश्विक शक्तियों ने संयम बरतने और कूटनीतिक माध्यमों से तनाव कम करने का आह्वान किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह टकराव अनियंत्रित होकर व्यापक क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले सकता है, जिसका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। तेल की कीमतों में पहले से ही उछाल देखा जा रहा है। अमेरिका और ईरान दोनों के लिए अब कूटनीतिक रास्ता तलाशना अनिवार्य हो गया है, अन्यथा खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता लंबे समय तक बनी रह सकती है।