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Breaking News: संयुक्त राष्ट्र का ऐतिहासिक फैसला: दुनिया का नक्शा बदलने की तैयारी, मर्केटर प्रोजेक्शन होगा खत्म
🕒 2 days ago

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित करते हुए दुनिया भर के स्कूलों, शैक्षणिक संस्थानों और तकनीकी कंपनियों से सदियों पुराने मर्केटर प्रोजेक्शन वाले विश्व मानचित्र को त्यागने का आह्वान किया है। इस प्रस्ताव के पक्ष में भारत समेत कई देशों ने मतदान किया, जिसका उद्देश्य अफ्रीका और अन्य विकासशील महाद्वीपों के वास्तविक आकार को सही ढंग से दर्शाना है। 1569 में जेरार्डस मर्केटर द्वारा विकसित यह प्रोजेक्शन नौवहन के लिए तो उपयोगी था, लेकिन इसने ध्रुवों के निकट के क्षेत्रों को अत्यधिक बड़ा और भूमध्य रेखा के निकट के देशों को छोटा दिखाकर भौगोलिक असमानता को जन्म दिया। विशेषज्ञों के अनुसार, मर्केटर मानचित्र पर ग्रीनलैंड अफ्रीका जितना बड़ा दिखाई देता है, जबकि वास्तव में अफ्रीका ग्रीनलैंड से लगभग 14 गुना बड़ा है। इसी तरह, यूरोप और उत्तर अमेरिका अपने वास्तविक आकार से कहीं अधिक बड़े नजर आते हैं, जिससे पूर्वाग्रहपूर्ण विश्व दृष्टिकोण पैदा होता है। संयुक्त राष्ट्र की नई पहल 'सही मानचित्र' अभियान के तहत ऑटोग्राफ या पीटर्स प्रोजेक्शन जैसे समान क्षेत्रफल वाले मानचित्रों को अपनाने की सिफारिश करती है, जो सभी देशों के वास्तविक भौगोलिक अनुपात को बनाए रखते हैं। भारत ने इस प्रस्ताव के समर्थन में मतदान करते हुए कहा कि यह कदम वैश्विक न्याय और समानता की दिशा में महत्वपूर्ण है। भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने जोर देकर कहा कि सही भौगोलिक प्रतिनिधित्व से विकासशील देशों की वास्तविक क्षमता और संसाधनों की समझ बेहतर होगी। तकनीकी दिग्गज गूगल, एप्पल और माइक्रोसॉफ्ट से भी अपने मैपिंग प्लेटफॉर्म पर डिफॉल्ट व्यू बदलने का अनुरोध किया गया है, जिससे अरबों उपयोगकर्ताओं तक सही जानकारी पहुंचे। शैक्षणिक जगत में इस फैसले का व्यापक स्वागत हुआ है। भूगोल के प्रोफेसरों का मानना है कि नई पीढ़ी को विकृत मानचित्रों के बजाय वैज्ञानिक रूप से सटीक मानचित्रों से पढ़ाया जाना चाहिए। कई देशों ने पहले ही अपने पाठ्यक्रम में बदलाव शुरू कर दिए हैं। यूनेस्को ने भी सदस्य देशों से 2025 तक नए मानचित्र मानकों को अपनाने का आग्रह किया है। यह परिवर्तन केवल मानचित्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वैश्विक शक्ति संतुलन और विकासशील देशों के प्रति दृष्टिकोण में मूलभूत बदलाव का प्रतीक है। जब अफ्रीका, दक्षिण अमेरिका और एशिया के देश अपने वास्तविक आकार में दिखेंगे, तो उनकी आर्थिक क्षमता, प्राकृतिक संसाधन और रणनीतिक महत्व की समझ भी बेहतर होगी। संयुक्त राष्ट्र का यह कदम एक अधिक न्यायसंगत और सटीक विश्व व्यवस्था की ओर बढ़ाया गया महत्वपूर्ण कदम है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 06 Sep 2026