नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद बचाव अभियान में एक चमत्कारिक घटना घटी है। दस दिनों तक सुरंग के अंदर मलबे और पानी के बीच फंसे रहने के बाद एक चीनी मजदूर और एक नेपाली महिला को जिंदा बचा लिया गया है। इस दुर्लभ सफलता ने न केवल पीड़ित परिवारों को राहत दी है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बचाव दलों के साहस और तकनीकी कौशल की सराहना भी हो रही है। नेपाल के पहाड़ी क्षेत्र में स्थित एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग में अचानक आई बाढ़ ने कई निर्माण स्थलों को अपनी चपेट में ले लिया था। सुरंग के अंदर काम कर रहे दर्जनों मजदूर अचानक आए पानी और मलबे के कारण फंस गए थे। बचाव दल ने दिन-रात अथक परिश्रम किया, लेकिन मलबा अधिक होने और पानी का स्तर बढ़ने के कारण पहुंचना असंभव सा लग रहा था। दसवें दिन भारतीय सुरंग विशेषज्ञों की टीम की मदद से विशेष उपकरणों का उपयोग कर सुरंग के अंदर तक रास्ता बनाया गया और दोनों जीवित व्यक्तियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस बचाव अभियान की सबसे मार्मिक बात यह रही कि सुरंग में फंसे लोगों ने अपनी जीवित होने की सूचना देने के लिए नेपाली शब्द "हुन्चा" और "हरे कृष्ण" का उच्चारण किया। इन दो शब्दों ने बचावकर्मियों को सही दिशा दिखाई और उनका हौसला बढ़ाया। भारतीय बचाव दल ने अत्याधुनिक ड्रिलिंग मशीनों और संचार उपकरणों की मदद से सुरंग के अंदर फंसे लोगों तक ऑक्सीजन और पानी पहुंचाया, जिससे उनकी जान बच सकी। बचाए गए चीनी नागरिक और नेपाली महिला गंभीर रूप से निर्जलित और कमजोर अवस्था में मिले, लेकिन चिकित्सकों के अनुसार उनकी हालत अब स्थिर है। उन्हें तत्काल हेलीकॉप्टर से काठमांडू के अस्पताल ले जाया गया। नेपाल के प्रधानमंत्री और चीनी राजदूत ने बचाव दलों के साहस की प्रशंसा करते हुए इसे मानवीय संवेदना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। यह घटना प्राकृतिक आपदा के समय मानवीय संकल्प की शक्ति को दर्शाती है। नेपाल में बाढ़ से हुए व्यापक नुकसान का आकलन अभी जारी है, लेकिन इस सफल बचाव अभियान ने उम्मीद की नई किरण जगाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए बेहतर पूर्व चेतावनी प्रणाली, सुरंग सुरक्षा मानकों और अंतरराष्ट्रीय बचाव समन्वय तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है।