श्रीराम कॉलेज में प्रधानमंत्री की यह वापसी महज एक संबोधन नहीं, बल्कि उनके राजनीतिक सफर का एक प्रतीकात्मक पड़ाव है। 2011 में जिस युवा नेता ने यहां से राष्ट्रीय महत्वाकांक्षा का आगाज किया था, आज वह देश के सर्वोच्च पद पर बैठकर उसी मंच से नए भारत की रूपरेखा खींच रहा है। उनके भाषण में निरंतरता और परिवर्तन दोनों दिखे - आशावाद का वही मूल मंत्र, लेकिन शब्दों में नई धार और राजनीतिक संदेशों में स्पष्ट आक्रामकता। यह दौरा आगामी चुनावी रणनीति का भी हिस्सा माना जा रहा है, जहां युवा मतदाताओं को साधना भाजपा की प्राथमिकता है।