लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने दक्षिणपंथी प्रभावक स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ अपने नाम के कथित दुरुपयोग को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब भारद्वाज को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया और पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया। यह पूरा प्रकरण सोशल मीडिया पर चल रहे विवादास्पद पोस्ट्स और पॉडकास्ट से जुड़ा बताया जा रहा है, जिसमें भारद्वाज पर पासवान के नाम का अनधिकृत इस्तेमाल करने का आरोप है। शिकायत के अनुसार, स्वतंत्र भारद्वाज ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और पॉडकास्ट के माध्यम से चिराग पासवान के नाम और छवि का गलत तरीके से उपयोग किया, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची। भारद्वाज, जो पहले से ही अपने विवादास्पद बयानों और कथित नफरत भरे पोस्ट्स के लिए जाने जाते हैं, पर मारपीट और जातिसूचक टिप्पणियों के आरोप भी लगे हैं। सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन के बाद दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई करते हुए भारद्वाज को हिरासत में लिया। पटियाला हाउस कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान सीजेपी के वकील ने कानूनी प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जबकि भारद्वाज के समर्थकों ने पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया और जातिसूचक गालियों के इस्तेमाल पर सवाल खड़े किए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद भारद्वाज को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया, ताकि मामले की विस्तृत जांच की जा सके। इस दौरान भारद्वाज के खिलाफ दर्ज विभिन्न धाराओं के तहत जांच जारी है। इस घटना ने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की जिम्मेदारी और सार्वजनिक हस्तियों के नाम के दुरुपयोग जैसे मुद्दों को फिर से चर्चा में ला दिया है। चिराग पासवान की ओर से इस कार्रवाई को उनकी छवि 보호 के लिए जरूरी कदम बताया जा रहा है, वहीं भारद्वाज के समर्थक इसे अभिव्यक्ति की आजादी पर हमला बता रहे हैं। पुलिस अब मामले के सभी पहलुओं की गहन जांच कर रही है, जिसमें डिजिटल साक्ष्य और सोशल मीडिया पोस्ट्स की पड़ताल शामिल है। आने वाले दिनों में इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी, जिसमें अदालत के समक्ष पेश किए जाने वाले सबूत अहम भूमिका निभाएंगे। यह प्रकरण न केवल दो व्यक्तियों के बीच के विवाद तक सीमित है, बल्कि डिजिटल युग में नाम, छवि और प्रतिष्ठा के अधिकारों से जुड़े बड़े सवाल भी खड़े करता है। सभी पक्षों की निगाहें अब पुलिस जांच और अदालती कार्यवाही के अगले चरण पर टिकी हुई हैं।