अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई द्वारा मोस्ट वांटेड घोषित किए गए भारतीय मूल के ठग मनजीत सिंह बेदी को पंजाब पुलिस ने जालंधर से गिरफ्तार करने में बड़ी कामयाबी हासिल की है। बेदी पर अमेरिका में सरकारी लाभ योजनाओं में धोखाधड़ी कर लगभग 6 लाख डॉलर यानी करीब 5.6 करोड़ रुपये का घोटाला करने का आरोप है। इस गिरफ्तारी को अंतरराष्ट्रीय अपराध नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मनजीत सिंह बेदी लंबे समय से एफबीआई की रडार पर था और उसे भगोड़ा घोषित कर उसकी तलाश की जा रही थी। एफबीआई ने उसे अपनी मोस्ट वांटेड धोखेबाजों की सूची में शामिल किया था। बेदी पर आरोप है कि उसने फर्जी दस्तावेजों और पहचान के जरिए अमेरिकी सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का गलत लाभ उठाया। इस घोटाले में उसने करोड़ों रुपये की रकम हड़पी। भारतीय एजेंसियों और एफबीआई के बीच सूचना साझा होने के बाद पंजाब पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए उसे जालंधर से धर दबोचा। गिरफ्तारी के बाद बेदी को स्थानीय अदालत में पेश किया गया जहां से उसे ट्रांजिट रिमांड पर लिया गया है। अब उसे दिल्ली लाकर प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि यह ऑपरेशन केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय में चलाया गया था। बेदी के पास से कई फर्जी पहचान पत्र, पासपोर्ट और अन्य दस्तावेज बरामद हुए हैं जिनकी जांच की जा रही है। इस मामले ने एक बार फिर साइबर अपराध और अंतरराष्ट्रीय धोखाधड़ी नेटवर्क की जटिलता को उजागर किया है। भारतीय मूल के अपराधियों द्वारा विदेशी धरती पर घोटाले करने के मामले बढ़ रहे हैं। एफबीआई और भारतीय एजेंसियों के बीच बढ़ता सहयोग ऐसे अपराधियों पर नकेल कसने में कारगर साबित हो रहा है। बेदी की गिरफ्तारी से उसके पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश होने की उम्मीद है। फिलहाल कानूनी प्रक्रिया जारी है और बेदी को अमेरिका प्रत्यर्पित करने की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। इस गिरफ्तारी से उन तमाम भगोड़ों को कड़ा संदेश गया है जो कानून से बचने के लिए सीमाओं का सहारा लेते हैं। भारतीय जांच एजेंसियां अब बेदी के अन्य साथियों और इस घोटाले से जुड़े तारों की गहन पड़ताल में जुट गई हैं।