थाईलैंड के फुकेट से दिल्ली आ रहे एअर इंडिया के एक विमान में गत दिनों उस समय गंभीर संकट उत्पन्न हो गया जब 36 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ान भरते वक्त कुछ ही सेकंड में विमान की पूरी हाइड्रोलिक प्रणाली ठप हो गई। इस तकनीकी खराबी के चलते विमान को 'एल्टीट्यूड अपसेट' यानी ऊंचाई पर अनियंत्रित स्थिति का सामना करना पड़ा। विमान में सवार यात्रियों और चालक दल के लिए वे क्षण बेहद भयावह थे, हालांकि पायलटों ने सूझबूझ और प्रशिक्षण का परिचय देते हुए विमान को सुरक्षित दिल्ली हवाई अड्डे पर उतार लिया। इस घटना ने विमानन सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारतीय विमानन जांच ब्यूरो (एएआईबी) की प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार, बोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान के दोनों हाइड्रोलिक सिस्टम एक साथ फेल हो गए थे, जो अत्यंत दुर्लभ और गंभीर स्थिति मानी जाती है। हाइड्रोलिक प्रणाली विमान के ब्रेक, स्टीयरिंग, लैंडिंग गियर और फ्लाइट कंट्रोल सतहों को संचालित करती है। इसके फेल होने से पायलटों के पास विमान को नियंत्रित करने के बेहद सीमित विकल्प बचे थे। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि इतनी गंभीर खराबी के बावजूद विमान को नजदीकी हवाई अड्डे पर डायवर्ट नहीं किया गया और वह दिल्ली तक उड़ान भरता रहा। इस निर्णय पर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। एएआईबी की रिपोर्ट ने तीन महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं दिए हैं, जिससे जांच की पारदर्शिता पर संदेह गहरा गया है। पहला, हाइड्रोलिक फेल होने का मूल कारण क्या था? दूसरा, विमान को डायवर्ट क्यों नहीं किया गया? और तीसरा, क्या उड़ान से पहले विमान की रखरखाव जांच में कोई चूक हुई थी? इन अनुत्तरित प्रश्नों ने विमानन नियामक डीजीसीए और एअर इंडिया की सुरक्षा ऑडिट प्रक्रिया को कटघरे में खड़ा कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटना भविष्य में न हो, इसके लिए गहन प्रणालीगत सुधार आवश्यक हैं। इस घटना के कुछ ही घंटों बाद एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ जब एअर इंडिया ने उक्त उड़ान के पायलट को बर्खास्त कर दिया। सूत्रों के अनुसार, पायलट का ड्रग टेस्ट पॉजिटिव आया था, जिसके बाद एयरलाइन ने तत्काल प्रभाव से उसे सेवा से मुक्त कर दिया। यह तथ्य बेहद चिंताजनक है कि एक पायलट, जिसके कंधों पर सैकड़ों यात्रियों की जान की जिम्मेदारी थी, वह नशे की हालत में विमान उड़ा रहा था। एअर इंडिया ने बयान जारी कर कहा कि सुरक्षा से समझौता बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और जीरो टॉलरेंस नीति का पालन किया जा रहा है। इस दोहरी घटना ने भारतीय विमानन क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। जहां एक ओर तकनीकी खामी ने विमान को खतरे में डाला, वहीं मानवीय चूक ने स्थिति को और भयावह बना दिया। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) को इस मामले में स्वतंत्र और गहन जांच सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि जिम्मेदारी तय हो सके और भविष्य के लिए ठोस सुरक्षा प्रोटोकॉल स्थापित किए जा सकें। यात्रियों का भरोसा जीतने के लिए पारदर्शिता और जवाबदेही ही एकमात्र रास्ता है।