नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने देश की अर्थव्यवस्था को गहरा झटका दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा से नेपाल को लगभग 2.56 अरब डॉलर यानी करीब 21 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक भारी बारिश और भूस्खलन ने सड़कों, पुलों, बिजली संयंत्रों और कृषि भूमि को भारी क्षति पहुंचाई है। नेपाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पुनर्निर्माण और राहत कार्यों के लिए सहायता की अपील की है। इस त्रासदी ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र की जलवायु परिवर्तन के प्रति संवेदनशीलता को उजागर किया है। भारतीय नागरिकों पर इस बाढ़ का कहर सबसे अधिक टूटा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार अब तक 166 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जिनमें तीन और लोग हाल ही में बचाए गए हैं, इनमें पांच साल का एक बच्चा भी शामिल है। लेकिन चिंता की बात यह है कि 275 भारतीय नागरिक अब भी लापता हैं। भारत सरकार लगातार नेपाल सरकार के संपर्क में है और बचाव अभियान में तेजी लाने के लिए हरसंभव सहयोग दे रही है। भारतीय दूतावास काठमांडू में एक विशेष नियंत्रण कक्ष स्थापित कर लापता लोगों के परिजनों को जानकारी उपलब्ध करा रहा है। इस त्रासदी के बीच भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर जलवायु वित्त का मुद्दा जोर-शोर से उठाया है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार भारत ने कहा है कि विकसित देशों को जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वित्तीय सहायता में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए। भारत का तर्क है कि हिमालयी क्षेत्र के देश जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे कम जिम्मेदार हैं, लेकिन इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। नेपाल की बाढ़ इसका ताजा उदाहरण है जहां अत्यधिक बारिश ने अभूतपूर्व तबाही मचाई है। इस बीच नेपाल में बौद्ध समुदाय ने लापता परिजनों की आत्मा की शांति के लिए प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार शुरू कर दिए हैं। ईटीवी भारत के अनुसार बौद्ध परंपरा के अनुसार जब किसी व्यक्ति का शव नहीं मिलता तो 49 दिनों तक प्रार्थना और अनुष्ठान किए जाते हैं। सैकड़ों परिवार जिनके अपने बाढ़ में बह गए, वे मठों में जाकर लामा से प्रार्थना करवा रहे हैं। यह दृश्य हृदयविदारक है और त्रासदी की गहराई को दर्शाता है। नेपाल बाढ़ त्रासदी ने दक्षिण एशिया के लिए जलवायु अनुकूलन और आपदा प्रबंधन की तत्काल आवश्यकता को रेखांकित किया है। भारत-नेपाल सहयोग इस संकट की घड़ी में मजबूती से सामने आया है, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए क्षेत्रीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय जलवायु वित्त अनिवार्य है। लापता 275 भारतीयों की तलाश जारी है और उम्मीद है कि बचाव दल अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित निकाल पाएंगे।