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Breaking News: ईरान संघर्ष 'युद्ध नहीं', उपराष्ट्रपति वांस ने नहीं दी समाप्ति की समयसीमा
🕒 3 days ago

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने ईरान के साथ जारी तनाव को 'युद्ध' की संज्ञा देने से साफ इनकार कर दिया है और इसके समाप्त होने की कोई निश्चित समयसीमा बताने से मना कर दिया। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि मौजूदा स्थिति को युद्ध नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह एक जटिल भू-राजनीतिक गतिरोध है जिसका समाधान कूटनीतिक, आर्थिक और सैन्य दबाव के सम्मिलित प्रयासों से निकाला जाएगा। वांस के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में नई बहस को जन्म दे दिया है। उपराष्ट्रपति वांस ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ट्रम्प के पास ईरान से निपटने के लिए सभी विकल्प मौजूद हैं। इनमें आर्थिक प्रतिबंधों को और कड़ा करना, सैन्य तैयारियों को बढ़ाना, कूटनीतिक अलग-थलग करना और गुप्त दबाव बनाना शामिल है। उन्होंने कहा कि अमेरिका ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों को लेकर गंभीर है। वांस ने यह भी संकेत दिया कि यदि ईरान अपने रवैये में बदलाव नहीं लाता तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश अधिक कठोर कदम उठाने से नहीं हिचकेंगे। इस बीच अमेरिकी प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान के साथ किसी भी प्रकार की वार्ता तब तक संभव नहीं है जब तक कि लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हमले पूरी तरह बंद नहीं हो जाते। हूती विद्रोहियों द्वारा इजरायल से जुड़े जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद से क्षेत्र में तनाव चरम पर है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने नौसैनिक गश्त बढ़ा दी है, जबकि ईरान ने इसे अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि वांस का बयान अमेरिकी रणनीति में लचीलेपन का संकेत देता है। एक तरफ वे संघर्ष को युद्ध न कहकर तनाव कम करने का संकेत दे रहे हैं, तो दूसरी तरफ सभी विकल्प खुले रखकर ईरान पर दबाव बनाए हुए हैं। इस दोहरी नीति का उद्देश्य ईरान को वार्ता की मेज पर लाना है, लेकिन ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई ने पहले ही अमेरिका के साथ किसी भी सीधी बातचीत से इनकार कर दिया है। अंततः यह स्थिति मध्य पूर्व में अनिश्चितता को बढ़ा रही है। वैश्विक तेल बाजार पहले से ही अस्थिर हैं और किसी भी सैन्य टकराव का असर विश्व अर्थव्यवस्था पर पड़ना तय है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय देश शांति की अपील कर रहे हैं, लेकिन जब तक दोनों पक्ष अपने रुख पर अड़े रहेंगे, समाधान की राह कठिन बनी रहेगी। अब सबकी नजर आने वाले सप्ताहों में होने वाली कूटनीतिक गतिविधियों पर टिकी है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 04 Sep 2026