नेपाल के सिंधुपालचौक जिले में स्थित एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे दो मजदूरों को अचानक आई बाढ़ के नौ दिन बाद सफलतापूर्वक जीवित निकाल लिया गया है। यह बचाव अभियान उस समय एक बड़ी राहत बनकर आया जब आशा लगभग खत्म हो चुकी थी। भारी बारिश और भूस्खलन के कारण आई आकस्मिक बाढ़ ने परियोजना स्थल को भारी नुकसान पहुंचाया था, जिसमें दर्जनों मजदूर सुरंग के अंदर फंस गए थे। बचाव दलों ने अत्यंत कठिन परिस्थितियों में लगातार प्रयास जारी रखे और अंततः दो श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालने में सफलता प्राप्त की। बचाव अभियान से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि सुरंग के अंदर से मजदूरों की आवाजें सुनाई दे रही थीं, जिससे उनके जीवित होने की पुष्टि हुई। इसके बाद विशेषज्ञ गोताखोरों और इंजीनियरों की टीम ने मलबे और पानी से भरी सुरंग में प्रवेश कर उन्हें बाहर निकाला। निकाले गए दोनों मजदूरों की हालत स्थिर बताई जा रही है और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हालांकि, अभी भी कई मजदूरों के लापता होने की खबर है और उनकी तलाश जारी है। बचावकर्मियों के सामने सुरंग में भरा पानी, कीचड़ और अस्थिर चट्टानें सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। इस भीषण त्रासदी ने नेपाल की सीमा से सटे तिब्बत क्षेत्र को भी प्रभावित किया है। प्रारंभिक आकलन के अनुसार, इस बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं से नेपाल को लगभग 2.56 अरब डॉलर का आर्थिक नुकसान हुआ है। बुनियादी ढांचे, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को व्यापक क्षति पहुंची है। सरकार ने इसे राष्ट्रीय आपदा घोषित करते हुए राहत और बचाव कार्यों के लिए सेना और सशस्त्र पुलिस बल को तैनात किया है। अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियां भी राहत सामग्री और तकनीकी सहयोग के लिए आगे आई हैं। नेपाल के प्रधानमंत्री ने घटनास्थल का दौरा कर बचाव कार्यों का जायजा लिया और पीड़ित परिवारों को हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि सरकार लापता लोगों की तलाश में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। साथ ही, भविष्य में ऐसी आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए पूर्व चेतावनी प्रणाली और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्र में ऐसी चरम मौसम की घटनाओं की आवृत्ति बढ़ रही है, जिससे दीर्घकालिक योजना की आवश्यकता है। इस दुखद घटना के बीच दो जिंदगियों का बच जाना मानवीय जिजीविषा और बचावकर्मियों के अदम्य साहस का प्रमाण है। यह घटना हमें प्राकृतिक आपदाओं के सामने तैयारी और त्वरित प्रतिक्रिया के महत्व को फिर से याद दिलाती है। जैसे-जैसे बचाव अभियान आगे बढ़ रहा है, पूरा देश शेष फंसे हुए मजदूरों की सुरक्षित वापसी की प्रार्थना कर रहा है। इस त्रासदी से सबक लेकर नेपाल को अपनी आपदा प्रबंधन क्षमताओं को और सुदृढ़ करने की दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे।