नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण सैकड़ों गांव जलमग्न हो गए हैं और मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल घरों और सड़कों को तबाह किया है, बल्कि अनगिनत परिवारों को बिछड़ने का गहरा घाव भी दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार अब तक दो सौ से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि दर्जनों लोग अब भी लापता हैं। बचाव दल दूरदराज के इलाकों तक पहुंचने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं, लेकिन टूटी सड़कों और खराब मौसम के कारण राहत कार्यों में भारी बाधा आ रही है। इस त्रासदी के बीच एक पिता की मार्मिक कहानी सामने आई है जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर दिया। अपने लापता बेटे की तलाश में एक गरीब पिता ने तेरह डॉलर उधार लिए और कई दिनों तक पैदल चलकर बाढ़ प्रभावित इलाकों की खाक छानी। उसके पास न तो कोई वाहन था और न ही पर्याप्त संसाधन, लेकिन बेटे को ढूंढने का जुनून उसे आगे बढ़ाता रहा। वह कीचड़ से भरे रास्तों, उफनती नदियों और मलबे के ढेर के बीच से गुजरता हुआ उन स्थानों तक पहुंचा जहां बचाव दल अभी नहीं पहुंच पाए थे। उसकी आंखों में आंसू और दिल में उम्मीद लिए यह सफर उस असहाय पिता की व्यथा को बयां करता है जो व्यवस्था की लाचारी के सामने भी हार मानने को तैयार नहीं है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नेपाल की सहायता के लिए हाथ बढ़ाए जा रहे हैं। भारत ने पांचवां विमान भेजकर बचाव दल और साढ़े पांच टन दवाइयां उपलब्ध कराई हैं। भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर दुर्गम इलाकों में फंसे लोगों को निकालने में जुटे हैं। वहीं, पोप लियो ने भी नेपाल के बाढ़ पीड़ितों के लिए सहायता की अपील करते हुए विश्व समुदाय से तत्काल मदद की गुहार लगाई है। एनडीटीवी की एक रिपोर्ट में हेलीकॉप्टर यात्रा के माध्यम से तबाही का मंजर दिखाया गया जहां पूरी घाटी मौन साधे खड़ी है और चारों ओर केवल मलबा और बर्बादी नजर आती है। टेलीग्राफ इंडिया ने इसे प्रकृति का क्रोध बताया है जिसने नेपाल की कमर तोड़ दी है। बचाव कार्यों में लगी टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती संचार व्यवस्था ठप होने और सड़कों के पूरी तरह ध्वस्त होने की है। कई गांवों का संपर्क पूरी तरह कट चुका है और वहां तक राहत सामग्री पहुंचाना लगभग असंभव सा हो गया है। स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ सेना और स्वयंसेवी संगठन दिन-रात एक किए हुए हैं। बाढ़ के पानी में बह गए घरों के मलबे से शवों को निकालने का सिलसिला जारी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बाढ़ के बाद महामारी फैलने की आशंका जताते हुए स्वच्छ पानी और दवाओं की तत्काल आपूर्ति पर जोर दिया है। इस भयावह त्रासदी ने एक बार फिर जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों को सामने ला दिया है। नेपाल जैसे पहाड़ी देश जहां भौगोलिक संरचना पहले से ही संवेदनशील है, वहां अत्यधिक बारिश विनाश का कारण बन रही है। पिता द्वारा बेटे की तलाश में पैदल चलने की कहानी जहां मानवीय संवेदना की मिसाल है, वहीं यह व्यवस्था की विफलता को भी उजागर करती है। अब जरूरत है कि राहत कार्य केवल तात्कालिक न रहकर दीर्घकालिक पुनर्वास योजना में तब्दील हों। अंतरराष्ट्रीय सहयोग, सरकारी प्रयास और सामाजिक भागीदारी ही नेपाल को इस गहरे जख्म से उबार सकती है। उम्मीद है कि लापता लोग सुरक्षित मिलें और बाढ़ पीड़ित जल्द ही सामान्य जीवन में लौट सकें।