पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है जब अमेरिकी हवाई हमलों में ईरान की सीमा के भीतर 11 लोगों की मौत हो गई। ईरानी अधिकारियों ने शनिवार को पुष्टि की कि अमेरिकी ड्रोन और मिसाइल हमलों ने देश के कई इलाकों को निशाना बनाया, जिसमें एक शादी समारोह भी शामिल था। इस भीषण हमले में एक बच्चे समेत पांच लोगों की मौत हो गई जबकि 50 से अधिक लोग घायल हो गए। कई हफ्तों की शांति के बाद अचानक हुई इस सैन्य कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र में खलबली मचा दी है और वैश्विक शक्तियों को चिंता में डाल दिया है। ईरान की सरकारी मीडिया के अनुसार, अमेरिकी सेना ने सीमावर्ती प्रांतों में स्थित सैन्य ठिकानों और नागरिक बस्तियों पर समन्वित हमले किए। सबसे भयावह घटना एक गांव में हुई जहां शादी का जश्न चल रहा था और अचानक मिसाइलें गिरीं। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि खुशी का माहौल मातम में बदल गया जब धमाकों ने पूरे पंडाल को तबाह कर दिया। घायलों में महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हैं जिन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन और युद्ध अपराध करार देते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है। अमेरिकी रक्षा विभाग ने हमलों की पुष्टि करते हुए कहा कि ये कार्रवाई ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों द्वारा हाल के दिनों में इराक और सीरिया में अमेरिकी ठिकानों पर किए गए ड्रोन हमलों के जवाब में की गई है। पेंटागन के प्रवक्ता ने दावा किया कि निशाने पर केवल सैन्य सुविधाएं और हथियार भंडार थे, लेकिन नागरिक हताहतों की खबरों की जांच की जा रही है। हालांकि, ईरान ने इन दावों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका जानबूझकर नागरिक आबादी को निशाना बना रहा है ताकि क्षेत्र में अस्थिरता फैलाई जा सके। ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई ने चेतावनी दी कि इस कायरतापूर्ण हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा और अमेरिका को "भूल न सकने वाले सबक" सिखाए जाएंगे। इस ताजा टकराव ने 2015 के परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने की कूटनीतिक कोशिशों को गहरा झटका दिया है। क्षेत्रीय विशेषज्ञों का मानना है कि इजराइल-हमास युद्ध के बाद से ही पश्चिम एशिया बारूदी ढेर पर बैठा है और अमेरिका-ईरान की सीधी भिड़ंत पूरे मध्य पूर्व को बड़े संघर्ष में झोंक सकती है। रूस और चीन ने संयम बरतने की अपील की है जबकि यूरोपीय संघ ने तनाव कम करने के लिए बातचीत का आग्रह किया है। भारत ने भी दोनों पक्षों से संयम बनाए रखने और कूटनीतिक रास्ते अपनाने की सलाह दी है, क्योंकि क्षेत्र में अस्थिरता का असर ऊर्जा सुरक्षा और भारतीय प्रवासियों पर पड़ सकता है। जैसे-जैसे स्थिति विकट होती जा रही है, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति के दरवाजे खुले रहेंगे या हथियारों की गूंज ही भविष्य तय करेगी। ईरान ने बदले की कार्रवाई की चेतावनी दे दी है और अमेरिका ने भी अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाने का संकल्प दोहराया है। आने वाले दिन बेहद नाजुक होंगे जब एक गलत कदम पूरे क्षेत्र को विनाशकारी युद्ध की आग में झोंक सकता है। शांति की उम्मीद अब सिर्फ संयम और समझदारी पर टिकी है।