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Breaking News: सीजेपी ने दिल्ली मार्च वापस लिया, केंद्र के आश्वासन के बाद सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों पर दर्ज एफआईआर रद्द कीं
🕒 5 days ago

नागरिक अधिकार संगठन सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) ने आगामी 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित विरोध मार्च को वापस लेने की घोषणा की है। यह निर्णय केंद्र सरकार की ओर से मिले उन ठोस आश्वासनों के बाद लिया गया है, जिनमें छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के खिलाफ दर्ज मुकदमों को वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही गई है। संगठन ने इसे लोकतांत्रिक संघर्ष की एक बड़ी जीत बताते हुए कहा कि सरकार के रुख में आया यह बदलाव जनता की आवाज की ताकत को दर्शाता है। इस घटनाक्रम की पृष्ठभूमि में सर्वोच्च न्यायालय का एक ऐतिहासिक फैसला बेहद अहम रहा है। शीर्ष अदालत ने देशभर में छात्र आंदोलनों और नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं के विरोध में प्रदर्शन कर रहे युवाओं के खिलाफ दर्ज तमाम एफआईआर को रद्द करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि शांतिपूर्ण विरोध करना संवैधानिक अधिकार है और छात्रों को 'कट्टर अपराधी' मानकर उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। हालांकि, अदालत ने वास्तविक आपराधिक तत्वों पर मुकदमा चलाने की छूट बरकरार रखी है। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को सीजेपी प्रमुख ने 'ऐतिहासिक' करार देते हुए मुख्य न्यायाधीश की सराहना की है। शीर्ष अदालत ने भविष्य में भी इसी तरह के शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के मामले में बगैर ठोस आधार के एफआईआर दर्ज करने पर रोक लगा दी है, जिसे कानूनी जानकार नागरिक स्वतंत्रता की रक्षा में एक बड़ा कदम मान रहे हैं। इस आदेश से हजारों उन छात्रों और युवाओं को राहत मिली है जिन पर केवल अपनी मांगों को उठाने के लिए आपराधिक मामले थोप दिए गए थे। केंद्र सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन और सुप्रीम कोर्ट के कड़े रुख के बाद सीजेपी ने अपना आंदोलन स्थगित करते हुए कहा कि वे सरकार की कार्रवाई पर नजर रखेंगे। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि वादे के मुताबिक मुकदमों की वापसी की प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी नहीं हुई तो वे फिर से सड़क पर उतरने को मजबूर होंगे। इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर साबित किया है कि न्यायपालिका की सक्रियता और नागरिक समाज का दबाव मिलकर सत्ता को जवाबदेह बनाने में सक्षम हैं। कुल मिलाकर, यह घटनाक्रम भारतीय लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संदेश लेकर आया है। जहां एक ओर छात्रों और युवाओं का अपनी बात कहने का हक बहाल हुआ है, वहीं दूसरी ओर सरकार और न्यायपालिका के बीच संतुलन की एक नई मिसाल कायम हुई है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि केंद्र और राज्य सरकारें अदालत के आदेश और दिए गए वचनों को कितनी ईमानदारी और तेजी से जमीन पर उतारती हैं।

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✍️ By Pradeep Yadav | 02 Sep 2026