अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव शनिवार को उस समय चरम पर पहुंच गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर हवाई हमलों की शुरुआत करते हुए 'सबसे बड़े हमले' की चेतावनी दी। ट्रंप ने अपने बयान में कहा कि अगर ईरान ने पलटवार किया तो उसे अब तक का सबसे भयंकर हमला झेलना पड़ेगा। इसके जवाब में ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई के सलाहकारों ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका को अपने इस कदम पर बेहद पछताना पड़ेगा। इस ताजा टकराव ने खाड़ी क्षेत्र में बड़े युद्ध की आशंकाओं को जन्म दे दिया है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय में गहरी चिंता व्याप्त है। प्राप्त रिपोर्टों के अनुसार अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों और परमाणु सुविधाओं को निशाना बनाया है। ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया है कि सिराक क्षेत्र में एक विवाह समारोह पर हुए हमले में कम से कम चार नागरिकों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए हैं। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) ने पुष्टि की है कि उन्होंने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए खाड़ी के पड़ोसी देशों और जॉर्डन में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल दागे हैं। दोनों पक्षों की ओर से जारी बयानों में एक-दूसरे को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी जा रही हैं। ट्रंप ने शनिवार सुबह अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लिखा कि ईरान पर हमला 'बहुत न्यायसंगत' था और यदि ईरान ने प्रतिक्रिया दी तो अमेरिका 'और भी कठोर' हमले करेगा। वहीं ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका के इस 'आक्रमणकारी कृत्य' का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा और इसकी पूरी जिम्मेदारी व्हाइट हाउस पर होगी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने आपात बैठक बुलाई है जबकि रूस, चीन और यूरोपीय संघ ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है। खाड़ी क्षेत्र के देशों में इस ताजा घटनाक्रम से भय का माहौल है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कतर और बहरीन ने अपने नागरिकों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल देखा गया है क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरने वाले तेल टैंकरों की सुरक्षा को लेकर आशंकाएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह टकराव लंबा खिंचा तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसका गहरा असर पड़ेगा। भारत ने भी इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए दोनों देशों से तनाव कम करने और कूटनीतिक माध्यमों से विवाद सुलझाने का आग्रह किया है। विदेश मंत्रालय ने खाड़ी क्षेत्र में रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दूतावासों को अलर्ट पर रखा है। विश्व समुदाय की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या यह टकराव पूर्ण युद्ध में तब्दील होगा या फिर पिछले गतिरोधों की तरह किसी कूटनीतिक समाधान तक पहुंचेगा। शांति और स्थिरता के लिए संयम ही एकमात्र रास्ता प्रतीत होता है।