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Breaking News: नेपाल की भीषण बाढ़ में 40 साल पुराना ग्रीनहाउस कैसे बचा, मालिकों ने सुनाई आपबीती
🕒 6 days ago

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने जहां हजारों घरों को तबाह कर दिया और 4,462 से अधिक लोग अभी भी लापता हैं, वहीं एक 40 वर्ष पुराना ग्रीनहाउस इस प्रलयकारी त्रासदी में भी अडिग खड़ा रहा। काठमांडू घाटी के बाहरी इलाके में स्थित इस ग्रीनहाउस के मालिकों ने बताया कि कैसे उन्होंने प्रकृति के इस भयानक रूप का सामना किया और उनका यह ढांचा कैसे बच गया। यह घटना न केवल निर्माण तकनीक की मजबूती को दर्शाती है, बल्कि आपदा प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण सबक भी देती है। ग्रीनहाउस के मालिक राम बहादुर श्रेष्ठ और उनका परिवार उस भयावह रात को याद करते हुए बताते हैं कि पानी का स्तर इतनी तेजी से बढ़ा कि उन्हें कुछ समझने का समय ही नहीं मिला। "पहले तो सामान्य बारिश लगी, लेकिन रात 10 बजे के बाद पानी का बहाव अचानक तेज हो गया," राम बहादुर ने कहा। "हमारे घर का निचला तल पूरी तरह डूब गया, लेकिन ग्रीनहाउस का ऊंचा प्लेटफॉर्म और मजबूत कंक्रीट का आधार पानी के दबाव को झेल गया।" परिवार ने छत पर शरण ली और पूरी रात बाढ़ के थमने का इंतजार करते रहे। विशेषज्ञों का मानना है कि इस ग्रीनहाउस के बचने के पीछे कई कारक जिम्मेदार हैं। इसका निर्माण 1984 में जापानी तकनीक से किया गया था, जिसमें ऊंचे प्लेटफॉर्म, जल निकासी की उचित व्यवस्था और भूकंपरोधी संरचना शामिल थी। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (यूएसजीएस) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल की इस त्रासदी का कारण केवल भारी बारिश नहीं, बल्कि पहाड़ों पर जमा मलबा, ग्लेशियर झीलों का फटना और अनियोजित शहरीकरण का मिला-जुला प्रभाव है। बचाव अभियान में लगे एनडीटीवी के संवाददाता ने अपनी डायरी में लिखा है कि सड़कें पूरी तरह गायब हो चुकी थीं, फिर भी बचाव दल छह दिनों तक बाढ़, मलबे और मौत के बीच काम करते रहे। "अब हर बचाव एक चमत्कार जैसा लगता है," एक बचावकर्मी ने कहा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस मानसून सीजन में अब तक 200 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों परिवार बेघर हो गए हैं। इस त्रासदी ने नेपाल के लिए कई सबक छोड़े हैं। ग्रीनहाउस की तरह ही मजबूत और वैज्ञानिक ढांचे भविष्य में जान-माल की रक्षा कर सकते हैं। सरकार को अब आपदा-प्रतिरोधी बुनियादी ढांचे, पूर्व चेतावनी प्रणाली और सुनियोजित शहरी विकास पर जोर देना होगा। जैसा कि विशेषज्ञ कहते हैं, "यह किसी एक कारण का परिणाम नहीं लगता," इसलिए समाधान भी बहुआयामी और दीर्घकालिक होना चाहिए। नेपाल के लोग इस विपदा से उबरने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन प्रकृति के सामने मानवीय सीमाओं का यह कठोर सबक लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

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✍️ By Pradeep Yadav | 02 Sep 2026