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Breaking News: ट्रंप के सहयोगी का दावा: दो साल में 'बेकार' हो जाएगा होरमुज जलडमरूमध्य, पाइपलाइन परियोजनाएं बदल देंगी वैश्विक तेल व्यापार
🕒 6 days ago

अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार और वित्त मंत्री पद के नामित स्कॉट बेसेंट ने एक चौंकाने वाला बयान देते हुए कहा है कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होरमुज जलडमरूमध्य अगले दो वर्षों में 'बेकार टुकड़ा पानी' बनकर रह जाएगा। बेसेंट के अनुसार, नई पाइपलाइन परियोजनाओं के पूरा होने के बाद विश्व का तेल व्यापार इस संकीर्ण जलमार्ग पर निर्भर नहीं रहेगा, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला में आमूलचूल परिवर्तन आएगा। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और भू-राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। बेसेंट ने विस्तार से बताया कि खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के देशों द्वारा विकसित की जा रही विशाल पाइपलाइन अवसंरचना होरमुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह से दरकिनार कर देगी। ये पाइपलाइनें सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देशों के तेल को सीधे लाल सागर और भूमध्य सागर के बंदरगाहों तक पहुंचाएंगी, जिससे ईरान द्वारा नियंत्रित इस रणनीतिक चोकपॉइंट का महत्व समाप्त हो जाएगा। वर्तमान में विश्व का लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है, और किसी भी तनाव की स्थिति में वैश्विक अर्थव्यवस्था पर इसके गंभीर परिणाम होते रहे हैं। इस घोषणा के साथ ही बेसेंट ने संकेत दिया कि ईरान के बैंकिंग क्षेत्र पर कड़े प्रतिबंध इसी सप्ताह लागू किए जा सकते हैं। यह कदम ईरान के तेल निर्यात और वित्तीय लेनदेन को और अधिक कठिन बनाएगा, जिससे तेहरान पर दबाव बढ़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि पाइपलाइन विकल्प तैयार होने के बाद अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान के खिलाफ अधिक आक्रामक नीति अपना सकेंगे, क्योंकि तेल आपूर्ति बाधित होने का खतरा न्यूनतम हो जाएगा। यह रणनीति मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन को स्थायी रूप से बदल सकती है। अमेरिका समर्थित एक वृहद योजना के तहत न केवल होरमुज बल्कि बाब अल-मंदब जलडमरूमध्य को भी दरकिनार करने वाले वैकल्पिक मार्ग विकसित किए जा रहे हैं। यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में जहाजों पर हमलों के बाद इस दिशा में प्रयास तेज हुए हैं। सऊदी अरब की 'ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन' का विस्तार, संयुक्त अरब अमीरात की 'फुजैरा पाइपलाइन' और इराक-तुर्की पाइपलाइन नेटवर्क के पुनरुद्धार जैसे कई प्रोजेक्ट निर्माणाधीन हैं। इन परियोजनाओं के पूरा होने पर खाड़ी का तेल स्वेज नहर और भूमध्य सागर के रास्ते यूरोप और अमेरिका पहुंच सकेगा। हालांकि, कई ऊर्जा विशेषज्ञ बेसेंट के दो वर्ष के समयसीमा को अत्यधिक आशावादी मानते हैं। पाइपलाइन क्षमता वर्तमान समुद्री परिवहन मात्रा का केवल एक अंश पूरा कर सकती है, और भारी पूंजी निवेश, तकनीकी चुनौतियों और क्षेत्रीय राजनीतिक मतभेदों के कारण पूर्ण विकल्प तैयार होने में अधिक समय लग सकता है। फिर भी, यह घोषणा ईरान को स्पष्ट संदेश देती है कि उसका भौगोलिक लाभ स्थायी नहीं है। दीर्घावधि में, यह विकास वैश्विक तेल बाजार को अधिक स्थिर बना सकता है, लेकिन अल्पावधि में यह क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 01 Sep 2026