अमेरिका के खजाना मंत्री स्कॉट बेसेंट ने एक बड़ी भविष्यवाणी करते हुए कहा है कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होरमुज जलडमरूमध्य अगले दो वर्षों में 'बेकार' साबित हो सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका ईरान पर आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ाने के स्पष्ट संकेत दे रहा है। बेसेंट के अनुसार, खाड़ी देशों द्वारा तेल निर्यात के लिए वैकल्पिक मार्गों और पाइपलाइनों में अरबों डॉलर का निवेश किया जा रहा है, जिससे इस संकीर्ण समुद्री रास्ते पर निर्भरता तेजी से कम हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह बयान वैश्विक ऊर्जा भू-राजनीति में आने वाले बड़े परिवर्तन का संकेत है। होरमुज जलडमरूमध्य, जिससे होकर विश्व का लगभग पांचवां हिस्सा तेल गुजरता है, लंबे समय से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता रहा है। ईरान अक्सर इस जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी देता रहा है, जिससे तेल कीमतों में उथल-पुथल मचती है। लेकिन अब सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और अन्य खाड़ी देश 'ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन' और 'हब-शुएबा पाइपलाइन' जैसी परियोजनाओं का विस्तार कर रहे हैं, जो लाल सागर और ओमान सागर तक सीधी पहुंच प्रदान करती हैं। इन परियोजनाओं पर अरबों डॉलर खर्च किए जा रहे हैं, जिसका उद्देश्य ईरानी खतरे से मुक्त एक सुरक्षित निर्यात मार्ग तैयार करना है। अमेरिका की नई रणनीति के तहत ईरान के तेल निर्यात पर प्रतिबंधों को और सख्ती से लागू किया जा रहा है। बेसेंट ने स्पष्ट किया कि वाशिंगटन ईरान के 'छाया बेड़े' और तेल तस्करी नेटवर्क को निशाना बनाएगा, जिससे तेहरान के राजस्व स्रोत पूरी तरह सूख जाएं। इस कदम का समर्थन करते हुए खाड़ी देश भी अपनी अर्थव्यवस्थाओं को तेल पर निर्भरता से मुक्त करने के लिए 'विजन 2030' जैसी योजनाओं पर तेजी से काम कर रहे हैं। विश्लेषकों के अनुसार, यदि वैकल्पिक मार्ग पूरी तरह चालू हो जाते हैं, तो ईरान का भौगोलिक लाभ समाप्त हो जाएगा और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन स्थायी रूप से बदल जाएगा। हालांकि, कुछ रणनीतिक विशेषज्ञ बेसेंट के दो वर्ष के समयसीमा को अत्यधिक आशावादी मानते हैं। उनका तर्क है कि नई पाइपलाइनों की क्षमता अभी भी होरमुज के माध्यम से होने वाले विशाल प्रवाह की पूरी भरपाई नहीं कर सकती। इसके अलावा, लाल सागर में हूती विद्रोहियों के हमले और क्षेत्रीय अस्थिरता वैकल्पिक मार्गों के लिए भी जोखिम पैदा करती है। फिर भी, निवेश की गति और राजनीतिक इच्छाशक्ति दर्शाती है कि खाड़ी देश अब अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए किसी एक चोक पॉइंट पर निर्भर नहीं रहना चाहते। निष्कर्षतः, बेसेंट का बयान केवल एक भविष्यवाणी नहीं, बल्कि एक सुविचारित भू-राजनीतिक रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है। यदि खाड़ी देश अपने वैकल्पिक निर्यात बुनियादी ढांचे को समय पर पूरा कर लेते हैं, तो होरमुज जलडमरूमध्य का रणनीतिक महत्व वास्तव में कम हो सकता है। यह न केवल ईरान के प्रभाव को सीमित करेगा, बल्कि वैश्विक तेल बाजार को झटकों से बचाने में भी मदद करेगा। आने वाले दो वर्ष इस बात का फैसला करेंगे कि क्या ऊर्जा की दुनिया वास्तव में एक नए युग में प्रवेश कर रही है।