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Breaking News: नेपाल में भीषण बाढ़ का कहर: 900 से अधिक मौतें, 4000 से ज्यादा लापता, सुरंग में फंसे मजदूरों की तलाश जारी
🕒 1 week ago

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या 900 को पार कर चुकी है, जबकि 4000 से अधिक लोग अब भी लापता हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे मजदूरों की है, जहां 93 श्रमिकों के लापता होने की खबर है। थर्मल ड्रोन और आधुनिक उपकरणों की मदद से चलाए जा रहे बचाव अभियान के बावजूद अब तक कोई सफलता हाथ नहीं लगी है। बचाव कार्यों में लगी टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरंगों में भरे पानी और कीचड़ की वजह से पहुंच न बना पाना है। सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार समय के साथ दौड़ लगाते हुए बचावकर्मी दिन-रात एक किए हुए हैं, लेकिन सुरंगों की जटिल संरचना और लगातार हो रही बारिश उनके प्रयासों को विफल कर रही है। एनडीटीवी के अनुसार थर्मल ड्रोन भी सुरंग के अंदर किसी जीवन के संकेत नहीं ढूंढ पाए हैं, जिससे फंसे हुए मजदूरों के परिजनों की चिंता बढ़ गई है। इस बीच द गार्डियन की एक रिपोर्ट ने नया विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें तिब्बत के कार्यकर्ताओं का दावा है कि चीन बाढ़ की वास्तविक भयावहता को छिपा रहा है। यह आरोप ऐसे समय में आया है जब नेपाल की सीमा से लगे तिब्बती क्षेत्रों में भी बाढ़ का व्यापक असर देखा गया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय और मानवाधिकार संगठन पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, ताकि प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य सुचारू रूप से चलाए जा सकें। नेपाल सरकार ने राष्ट्रीय आपदा घोषित करते हुए सेना, सशस्त्र पुलिस बल और स्थानीय स्वयंसेवकों को बड़े पैमाने पर तैनात किया है। अंतरराष्ट्रीय सहायता भी पहुंचनी शुरू हो गई है, जिसमें भारत, चीन और अन्य पड़ोसी देशों से राहत सामग्री और तकनीकी सहायता शामिल है। हालांकि, दूरदराज के इलाकों में संचार और परिवहन व्यवस्था पूरी तरह ठप होने से राहत पहुंचाने में भारी दिक्कत आ रही है। इस त्रासदी ने हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियोजित विकास, अंधाधुंध निर्माण और पर्यावरणीय मानदंडों की अनदेखी ऐसी आपदाओं को न्यौता दे रही है। अब जरूरत है कि पुनर्निर्माण के साथ-साथ दीर्घकालिक आपदा प्रबंधन योजनाएं बनाई जाएं, ताकि भविष्य में जान-माल का ऐसा नुकसान न हो।

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✍️ By Pradeep Yadav | 31 Aug 2026