जलवायु कार्यकर्ता और शिक्षाविद् सोनम वांगचुक ने नागरिक न्याय पार्टी (CJP) के नेताओं पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि ये नेता संत नहीं हैं और उनकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं छिपी हुई हैं। लद्दाख के प्रसिद्ध इंजीनियर और पर्यावरणविद् वांगचुक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा रखना गलत नहीं है, लेकिन आंदोलन की आड़ में इसे छिपाना जनता के साथ धोखा है। उनके इस बयान ने लद्दाख की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। वांगचुक ने खुलासा किया कि जुलाई 20 की कार्रवाई के बाद CJP के संस्थापक नेता आंदोलन समाप्त करना चाहते थे। उन्होंने दावा किया कि इन नेताओं ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी से संपर्क करके अनशन तुड़वाने की कोशिश की थी। वांगचुक के अनुसार, जब उन्हें लगा कि सब साथी छोड़कर चले गए हैं और अब कोई उम्मीद नहीं बची, तब उन्होंने अपना अनशन जारी रखने का फैसला किया। इस घटनाक्रम ने आंदोलन की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से बातचीत में वांगचुक ने कहा कि ईमानदार नेता ही बेहतर भविष्य की पहली सीढ़ी होते हैं। उन्होंने कॉकरोच खाकर अनशन करने वाले प्रदर्शनकारियों का जिक्र करते हुए भारत के राजनीतिक वर्ग पर निशाना साधा। वांगचुक का कहना है कि लद्दाख की जनता को राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत संरक्षण चाहिए, न कि नेताओं की निजी महत्वाकांक्षाओं की बलि। द वीक और इंडिया टीवी को दिए साक्षात्कार में वांगचुक ने दोहराया कि CJP के संस्थापकों की राजनीतिक महत्वाकांक्षाएं हैं, जिसे वे खुलकर स्वीकार नहीं कर रहे। उन्होंने कहा कि आंदोलन का नेतृत्व कर रहे लोग अगर सत्ता की सीढ़ी चढ़ना चाहते हैं, तो उन्हें जनता के सामने स्पष्ट करना चाहिए। इस पूरे प्रकरण ने लद्दाख के आंदोलन को नई दिशा दे दी है, जहां जनता अब नेताओं की नीयत पर सवाल उठाने लगी है। इस पूरे घटनाक्रम का निष्कर्ष यह निकलता है कि लद्दाख की जनता को अपने अधिकारों के लिए खुद ही लड़ना होगा, किसी नेतृत्व के भरोसे नहीं रहना चाहिए। वांगचुक के साहसिक खुलासे ने आंदोलन में पारदर्शिता ला दी है और अब जनता खुद तय करेगी कि उनका असली हितैषी कौन है। भविष्य में लद्दाख का आंदोलन किसी व्यक्ति या पार्टी पर निर्भर न रहकर जनआंदोलन के रूप में आगे बढ़े, यही समय की मांग है।