इस त्रासदी ने जलवायु परिवर्तन और हिमालयी क्षेत्र में अनियोजित विकास की पोल खोल दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लेशियर पिघलने और भारी बारिश के कारण ऐसी घटनाएं भविष्य में और बढ़ सकती हैं। प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण में वर्षों लगेंगे। फिलहाल पूरा ध्यान जीवित बचे लोगों को ढूंढने और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने पर केंद्रित है।