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Breaking News: नेपाल में भयावह बाढ़: मौत का आंकड़ा 800 के करीब, बचाव अभियान जारी
🕒 1 week ago

नेपाल के पहाड़ी इलाकों में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने तबाही का ऐसा मंजर खड़ा कर दिया है जिससे पूरा देश दहल गया है। ताजा रिपोर्टों के अनुसार इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की संख्या 788 तक पहुंच चुकी है और यह आंकड़ा 800 के करीब बढ़ता जा रहा है। सरकार ने कई जिलों में रेड अलर्ट जारी किया है और बचाव दल दिन-रात मलबे में दबे लोगों को निकालने में जुटे हुए हैं। इस आपदा ने न केवल जानमाल का नुकसान किया है बल्कि हजारों परिवारों को बेघर कर दिया है। बचाव अभियान में सबसे बड़ी चुनौती उन सुरंग श्रमिकों तक पहुंचना है जो भूस्खलन के मलबे में फंसे हुए हैं। बचावकर्मी भारी मशीनों और ड्रिलिंग उपकरणों की मदद से मलबे को काटकर अंदर फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। खराब मौसम और लगातार हो रही बारिश इन प्रयासों में बाधा डाल रही है। सेना, पुलिस और स्वयंसेवी संगठन मिलकर राहत सामग्री पहुंचाने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने का काम कर रहे हैं। कई गांव पूरी तरह से बाहरी दुनिया से कट गए हैं। इस त्रासदी का सबसे मार्मिक पहलू उन परिवारों का दर्द है जो अपने प्रियजनों की तलाश में नेपाल के विभिन्न हिस्सों से प्रभावित क्षेत्रों में पहुंच रहे हैं। अस्पतालों और शवगृहों के बाहर लोगों की भीड़ लगी हुई है जो अपनों की एक झलक पाने के लिए बेताब हैं। बाढ़ ने घरों, सड़कों, पुलों और बिजली-पानी की व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। तिब्बत के पठारी इलाकों से आने वाले पानी ने नदियों का जलस्तर खतरनाक स्तर तक बढ़ा दिया है जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस आपदा ने तिब्बती पठार पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और सीमा पार जल प्रबंधन में सहयोग की जटिलताओं को उजागर किया है। चीन का इस क्षेत्र पर नियंत्रण होने के कारण जल साझाकरण और पूर्व चेतावनी प्रणालियों में सहयोग मुश्किल हो रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर पिघलने और असामान्य वर्षा पैटर्न के कारण ऐसी आपदाएं भविष्य में और बढ़ सकती हैं। नेपाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील की है और कई देशों ने राहत सामग्री और तकनीकी सहायता भेजना शुरू कर दिया है। मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी दी है जिससे बचाव कार्यों में और मुश्किल आ सकती है। इस समय पूरा देश एकजुट होकर इस संकट का सामना कर रहा है लेकिन पुनर्निर्माण और प्रभावितों के पुनर्वास की राह लंबी और कठिन होगी।

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✍️ By Pradeep Yadav | 30 Aug 2026