नेपाल और तिब्बत क्षेत्र में आई भीषण अचानक बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक 623 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है जबकि 2,400 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। पिछले सप्ताह भारी बारिश के बाद नदियों में आए उफान ने कई गांवों और कस्बों को पूरी तरह जलमग्न कर दिया। इस प्राकृतिक आपदा ने नेपाल के साथ-साथ चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी हैं, लेकिन दुर्गम पहाड़ी इलाकों और खराब मौसम के कारण राहत पहुंचाने में भारी दिक्कतें आ रही हैं। इस त्रासदी के बीच तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्रियों का चमत्कारिक ढंग से बचना राहत की खबर है। ये श्रद्धालु कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे और बाढ़ की चपेट में आ गए थे। उन्होंने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि कैसे पानी का सैलाब पल भर में सब कुछ बहा ले गया। उन्होंने इसे 'फिल्मी दृश्य जैसा' बताते हुए कहा कि पहाड़ों से गिरते पत्थर और मलबे के बीच जान बचाना लगभग असंभव था। भारतीय दूतावास के प्रयासों से इन सभी तीर्थयात्रियों को सुरक्षित निकालकर स्वदेश लाया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने विदेशी सहायता स्वीकार करने का फैसला लिया है, जिसके बाद भारत ने तत्काल एनडीआरएफ और सेना की विशेष बचाव टीमें रवाना कर दी हैं। इससे पहले नेपाल ने विदेशी मदद लेने से इनकार कर दिया था, लेकिन हालात बिगड़ने पर उसने यू-टर्न लेते हुए अंतरराष्ट्रीय सहायता की अपील की। भारतीय बचाव दल हेलीकॉप्टरों, नावों और आधुनिक उपकरणों के साथ दूरदराज के इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस विनाशकारी बाढ़ के पीछे जलवायु परिवर्तन, अनियोजित निर्माण और हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना प्रमुख कारण हैं। लगातार कई दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश ने नदियों के जलस्तर को खतरे के निशान से कहीं ऊपर पहुंचा दिया। तिब्बत में ग्लेशियर झील के फटने (GLOF) की घटना ने भी तबाही को कई गुना बढ़ा दिया। इस घटना ने हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र की नाजुकता और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों को एक बार फिर उजागर कर दिया है। इस भीषण त्रासदी ने सैकड़ों परिवारों को उजाड़ दिया है और हजारों लोग बेघर हो गए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहायता की अपील की गई है, लेकिन पहाड़ी इलाकों तक राहत सामग्री पहुंचाना अब भी सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। नेपाल सरकार ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने और पुनर्वास योजना शुरू करने की घोषणा की है। इस आपदा ने एक बार फिर यह याद दिलाया है कि प्रकृति के सामने मानवीय तैयारियां कितनी बौनी साबित होती हैं। भविष्य में ऐसी त्रासदियों को रोकने के लिए जलवायु अनुकूल नीतियों, पूर्व चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करने और हिमालयी क्षेत्र में टिकाऊ विकास मॉडल अपनाने की सख्त जरूरत है।