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Breaking News: कर्नाटक मंत्री बी नागेंद्र ने भ्रष्टाचार विवाद में कैबिनेट से दिया इस्तीफा, दूसरी बार लगे वही आरोप
🕒 1 week ago

कर्नाटक की राजनीति में शुक्रवार को उस समय बड़ा भूचाल आया जब वरिष्ठ मंत्री बी नागेंद्र ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को अपना इस्तीफा सौंप दिया। वाल्मीकि विकास निगम घोटाले में नाम आने के बाद नागेंद्र ने भारी मन और आंखों में आंसू लिए कैबिनेट बैठक के दौरान ही पद छोड़ने की घोषणा की। यह दूसरा मौका है जब उन पर इसी प्रकार के भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं, इससे पहले भी उन्हें इसी मामले में पद छोड़ना पड़ा था। उनके इस्तीफे से सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार को बड़ा झटका लगा है, वहीं विपक्षी भाजपा ने इसे भ्रष्टाचार की खुली पोल बताते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग तेज कर दी है। वाल्मीकि विकास निगम में कथित वित्तीय अनियमितताओं का यह मामला पिछले कई महीनों से सुर्खियों में बना हुआ है। आरोप है कि निगम के खातों से करोड़ों रुपये की राशि का गबन किया गया और इसे फर्जी कंपनियों व व्यक्तियों के खातों में स्थानांतरित किया गया। जांच एजेंसियों की रडार पर आए मंत्री नागेंद्र पर आरोप है कि उनके कार्यकाल में निगम के कोष का दुरुपयोग हुआ। हालांकि नागेंद्र ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि उन्हें दलित होने के कारण निशाना बनाया जा रहा है। भावुक होते हुए उन्होंने मीडिया के सामने कहा कि उनकी छवि खराब करने की साजिश रची जा रही है, लेकिन वह जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने नागेंद्र का इस्तीफा स्वीकार करते हुए राज्यपाल को भेज दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाए हुए है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं, विपक्ष के नेता आर अशोक ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार भ्रष्टाचार में आकंठ डूबी हुई है और नागेंद्र का इस्तीफा महज दिखावा है। उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री को भी नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी लोकसभा चुनाव से ठीक पहले इस घटनाक्रम ने कांग्रेस की छवि को धक्का पहुंचाया है, जिसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ सकता है। इस पूरे प्रकरण में नया मोड़ तब आया जब नागेंद्र ने विधायक पद से भी इस्तीफा देने की पेशकश कर दी। उन्होंने स्पीकर को पत्र लिखकर कहा कि वह जनप्रतिनिधि बने रहने का नैतिक अधिकार खो चुके हैं। हालांकि पार्टी आलाकमान ने उन्हें फिलहाल विधायक बने रहने को कहा है। जांच एजेंसियां अब निगम के बैंक खातों, लेन-देन के रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की गहन पड़ताल कर रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) भी मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से मामले की जांच कर रहा है, जिससे आने वाले दिनों में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। निष्कर्षतः, बी नागेंद्र का दूसरी बार इसी घोटाले में इस्तीफा देना कर्नाटक की राजनीति में भ्रष्टाचार की गहरी जड़ों को उजागर करता है। जहां एक ओर सरकार निष्पक्ष जांच का दावा कर रही है, वहीं विपक्ष इसे चुनावी मुद्दा बनाने में जुट गया है। जनता की निगाहें अब जांच के नतीजों पर टिकी हैं कि क्या वास्तव में दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी राजनीतिक लेन-देन की भेंट चढ़ जाएगा। इस प्रकरण ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता और जवाबदेही कितनी आवश्यक है।

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✍️ By Pradeep Yadav | 28 Aug 2026