प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार दिवसीय यात्रा पर उज्बेकिस्तान रवाना हो गए हैं, जहां वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। यह यात्रा 29 अगस्त से शुरू होकर 1 सितंबर तक चलेगी, जिसमें प्रधानमंत्री उज्बेकिस्तान के अलावा किर्गिस्तान भी जाएंगे। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और संपर्कता जैसे अहम मुद्दों पर गहन चर्चा होने की संभावना है। प्रधानमंत्री की इस यात्रा को भारत की मध्य एशिया नीति को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। SCO शिखर सम्मेलन का आयोजन उज्बेकिस्तान के ऐतिहासिक शहर समरकंद में हो रहा है, जहां सदस्य देशों के नेता क्षेत्रीय चुनौतियों और अवसरों पर मंथन करेंगे। भारत 2017 से SCO का पूर्ण सदस्य है और इस मंच का उपयोग आतंकवाद विरोधी सहयोग, व्यापार सुगमता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान बढ़ाने के लिए करता रहा है। इस बार के सम्मेलन में ईरान को पूर्ण सदस्यता मिलने की प्रक्रिया भी पूरी हो सकती है, जिससे संगठन का दायरा और बढ़ेगा। प्रधानमंत्री मोदी अपने संबोधन में भारत की 'सुरक्षा और विकास के लिए सहयोग' दृष्टि को रेखांकित कर सकते हैं। इस यात्रा का सबसे चर्चित पहलू रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ प्रधानमंत्री मोदी की संभावित द्विपक्षीय बैठक है। यूक्रेन संकट शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने की मुलाकात होगी। रूस भारत का समय-परीक्षित रणनीतिक साझेदार रहा है और दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में गहरा सहयोग है। इस बैठक में द्विपक्षीय व्यापार असंतुलन दूर करने, रुपये-रूबल व्यापार तंत्र मजबूत करने और सुदूर पूर्व में भारतीय निवेश बढ़ाने पर बातचीत हो सकती है। उज्बेकिस्तान के राष्ट्रपति शौकत मिर्जियोएव के साथ भी प्रधानमंत्री की अलग से मुलाकात तय है, जिसमें दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाने पर जोर रहेगा। भारत उज्बेकिस्तान को चाबहार बंदरगाह के जरिए समुद्र तक पहुंच देने की परियोजना पर काम कर रहा है। किर्गिस्तान यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री वहां के नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा करेंगे और विकास सहयोग परियोजनाओं को गति देंगे। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी की यह मध्य एशिया यात्रा भारत की 'विस्तारित पड़ोस' नीति को मूर्त रूप देगी। SCO मंच के माध्यम से भारत क्षेत्रीय सहयोग का मजबूत पैरोकार बनकर उभर रहा है। पुतिन समेत अन्य वैश्विक नेताओं के साथ बैठकें भारत के कूटनीतिक प्रभाव को दर्शाती हैं। यह यात्रा न केवल द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देगी, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता और समृद्धि में भारत की भूमिका को भी रेखांकित करेगी।