नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है जबकि 750 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। यह विनाशकारी बाढ़ नेपाल-चीन सीमा पर ग्लेशियर के टूटने से आई बताई जा रही है, जिसने कई पूरे गांवों को पूरी तरह से मिटा दिया है। बचाव दल लगातार जीवित बचे लोगों की तलाश में जुटे हुए हैं, लेकिन खराब मौसम और दुर्गम इलाके राहत कार्यों में बाधा बन रहे हैं। एनडीटीवी द्वारा जारी हवाई वीडियो में तबाही का भयावह मंजर साफ देखा जा सकता है, जहां कभी बसे हुए गांव अब केवल मलबे और पानी के विशाल फैलाव में बदल चुके हैं। इस प्राकृतिक आपदा ने कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग को भी अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे 33 कोलकाता निवासी तीर्थयात्री लापता हो गए हैं। उनके परिजन चिंतित हैं और सरकार से शीघ्र खोज अभियान चलाने की गुहार लगा रहे हैं। नेपाल सरकार ने सेना, सशस्त्र पुलिस बल और स्थानीय प्रशासन को राहत और बचाव कार्य में झोंक दिया है। हेलीकॉप्टरों के माध्यम से दूरदराज के इलाकों में फंसे लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है, लेकिन लगातार हो रही बारिश और भूस्खलन से ऑपरेशन प्रभावित हो रहे हैं। इस त्रासदी पर पूरे देश ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी संवेदनाएं व्यक्त की जा रही हैं। बॉलीवुड अभिनेता सोनू सूद, मनीषा कोइराला और प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर प्रबल गुरुंग समेत कई जानी-मानी हस्तियों ने सोशल मीडिया के माध्यम से नेपाल के लोगों के प्रति संवेदना व्यक्त की है और प्रार्थना की है। भारत सरकार ने भी नेपाल को हर संभव सहायता देने का आश्वासन दिया है। एपी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, ग्लेशियर झील के फटने (GLOF) को इस भीषण बाढ़ का मुख्य कारण माना जा रहा है, जो जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों की ओर स्पष्ट संकेत करता है। नेपाल के प्रधानमंत्री ने आपात बैठक बुलाकर स्थिति की समीक्षा की है और मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा देने की घोषणा की है। साथ ही, लापता लोगों की तलाश के लिए अंतरराष्ट्रीय सहायता भी मांगी गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमें तैनात की हैं ताकि घायलों का त्वरित उपचार हो सके और महामारी फैलने से रोका जा सके। स्थानीय प्रशासन अस्थायी शिविरों में विस्थापितों के लिए भोजन, पानी और आश्रय की व्यवस्था कर रहा है। इस भयावह त्रासदी ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता और जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों को उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लेशियरों का तेजी से पिघलना और ग्लेशियर झीलों का निर्माण भविष्य में ऐसी और घटनाओं को आमंत्रण दे सकता है। नेपाल सरकार को अब दीर्घकालिक योजनाओं पर काम करना होगा, जिसमें पूर्व चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना, संवेदनशील इलाकों में बसावट को नियंत्रित करना और जलवायु अनुकूल बुनियादी ढांचे का निर्माण शामिल है। इस दुखद घटना से सबक लेते हुए पूरे हिमालयी क्षेत्र के देशों को मिलकर जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का सामना करने की रणनीति बनानी होगी।