नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। अब तक 160 से अधिक लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 750 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं। इस प्राकृतिक आपदा में भारतीय नागरिक भी बड़ी संख्या में प्रभावित हुए हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, लापता 844 लोगों में से कम से कम 133 भारतीय नागरिक शामिल हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित इलाके तिब्बत सीमा के निकटवर्ती क्षेत्र हैं, जहां लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण बचाव अभियान में बाधा आ रही है। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने स्पष्ट किया है कि यह घटना भूकंप नहीं, बल्कि एक शक्तिशाली भूस्खलन थी, जिसने नदियों का रास्ता रोककर अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी। इस संकट की घड़ी में भारत ने त्वरित सहायता का हाथ बढ़ाया है। केरल सरकार ने नेपाल में फंसे अपने नागरिकों और अन्य भारतीयों की सहायता के लिए एक आपातकालीन हेल्प डेस्क स्थापित की है। यह हेल्प डेस्क चौबीसों घंटे काम कर रही है और फंसे हुए लोगों को निकालने, उनके ठहरने, भोजन और चिकित्सा सहायता की व्यवस्था कर रही है। केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए अधिकारियों को नेपाल प्रशासन और भारतीय दूतावास के साथ समन्वय बनाकर राहत कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। नेपाल सरकार और अंतरराष्ट्रीय बचाव दल मिलकर युद्धस्तर पर तलाशी और बचाव अभियान चला रहे हैं। खराब मौसम, टूटी सड़कें और संचार व्यवस्था ठप होने के बावजूद हेलीकॉप्टरों और जमीनी दलों के जरिए दूरदराज के गांवों तक पहुंचने का प्रयास जारी है। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने आपात बैठक बुलाकर राहत कार्यों की समीक्षा की और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहयोग की अपील की है। मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में और बारिश की चेतावनी दी है, जिससे हालात और बिगड़ने की आशंका जताई जा रही है। भारतीय विदेश मंत्रालय भी स्थिति पर करीब से नजर रखे हुए है। काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं और नेपाल अधिकारियों के साथ मिलकर लापता भारतीयों का पता लगाने में जुटा है। कई भारतीय राज्यों ने भी अपने-अपने स्तर पर सहायता केंद्र खोले हैं। इस त्रासदी ने हिमालयी क्षेत्र की पारिस्थितिकी संवेदनशीलता और जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों को एक बार फिर उजागर किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियोजित विकास और पर्यावरणीय क्षरण ऐसी आपदाओं की तीव्रता बढ़ा रहे हैं। इस भीषण त्रासदी ने सैकड़ों परिवारों को उजाड़ दिया है और पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है। बचाव कार्य जारी रहने के साथ ही मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका बनी हुई है। भारत-नेपाल मैत्री के गहरे रिश्तों की कसौटी पर यह संकट खरा उतर रहा है, जहां भारत बिना देरी किए हरसंभव मदद पहुंचा रहा है। अब जरूरत इस बात की है कि राहत कार्यों में तेजी लाई जाए, बुनियादी ढांचे को जल्द दुरुस्त किया जाए और भविष्य में ऐसी आपदाओं से निपटने के लिए दीर्घकालिक योजनाएं बनाई जाएं। मानवता के सामने खड़ी इस चुनौती का सामना सामूहिक प्रयासों से ही संभव है।