नेपाल में अचानक आई भीषण बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है। नेपाल-चीन सीमा के निकट आए इस जलप्रलय में अब तक 17 लोगों के मारे जाने की पुष्टि हुई है, जबकि कई अन्य के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि सैकड़ों पर्यटक लापता बताए जा रहे हैं। नेपाल के तिब्बत सीमा से सटे इलाकों में बाढ़ का पानी इतनी तेजी से आया कि लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में तबाही का मंजर दिल दहला देने वाला है, जहां पूरा का पूरा गांव चंद सेकंड में पानी के सैलाब में समा गया। भारत ने पड़ोसी धर्म निभाते हुए तत्काल राहत अभियान शुरू कर दिया है। भारतीय वायुसेना का सी-130जे सुपर हरक्यूलिस विमान राहत सामग्री के साथ नेपाल रवाना होने के लिए तैयार खड़ा है। भारत सरकार ने नेपाल को हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। राहत सामग्री में टेंट, कंबल, दवाइयां, खाद्य सामग्री और पानी की बोतलें शामिल हैं। भारतीय दूतावास काठमांडू लगातार नेपाली अधिकारियों के संपर्क में है और स्थिति पर नजर बनाए हुए है। नेपाल सरकार ने भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय से सहायता की अपील की है। बाढ़ प्रभावित इलाकों में बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। नेपाली सेना, सशस्त्र पुलिस बल और स्थानीय प्रशासन की टीमें संयुक्त रूप से रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं। हालांकि खराब मौसम और दुर्गम इलाके बचाव कार्यों में बाधा बन रहे हैं। लापता पर्यटकों की तलाश के लिए हेलीकॉप्टरों की मदद ली जा रही है। कई गांवों का संपर्क पूरी तरह कट चुका है, जिससे वहां फंसे लोगों तक राहत पहुंचाना बड़ी चुनौती बना हुआ है। नेपाल के प्रधानमंत्री ने आपात बैठक बुलाकर स्थिति की समीक्षा की है और सभी एजेंसियों को अलर्ट पर रखा है। मौसम विभाग के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से हो रही भारी बारिश और ग्लेशियर झीलों के फटने से यह विनाशकारी बाढ़ आई है। जलवायु परिवर्तन के चलते हिमालयी क्षेत्र में ऐसी घटनाओं की आशंका बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ग्लेशियर पिघलने और अनियमित बारिश के कारण भविष्य में भी ऐसी त्रासदियां हो सकती हैं। नेपाल सरकार को दीर्घकालिक योजना बनाकर संवेदनशील इलाकों में पूर्व चेतावनी प्रणाली मजबूत करनी होगी। इस त्रासदी ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को उजागर किया है। भारत-नेपाल के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों का यह परीक्षण का समय है, और भारत की त्वरित प्रतिक्रिया सराहनीय है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को भी नेपाल की मदद के लिए आगे आना चाहिए। पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए उम्मीद है कि बचाव दल अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित निकालने में सफल होंगे। पुनर्वास और पुनर्निर्माण का कार्य त्रासदी थमने के बाद बड़ी चुनौती होगा, जिसमें सभी पक्षों को मिलकर काम करना होगा।