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Breaking News: रक्षा क्षेत्र में ऐतिहासिक कदम: सरकार ने डीआरडीओ की मिसाइल तकनीक निजी उद्योग को हस्तांतरित करने को दी मंजूरी
🕒 1 week ago

रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए केंद्र सरकार ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित मिसाइल तकनीकों को भारतीय निजी रक्षा उद्योग को हस्तांतरित करने की मंजूरी दे दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव को स्वीकृति प्रदान की गई, जिसे स्वदेशी रक्षा विनिर्माण को नई गति देने वाला मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। इस फैसले से न केवल सार्वजनिक क्षेत्र की रक्षा इकाइयों का एकाधिकार टूटेगा, बल्कि निजी क्षेत्र की भागीदारी से उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता और नवाचार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इस नीति के तहत डीआरडीओ द्वारा विकसित अत्याधुनिक मिसाइल प्रणालियों जैसे हवा से हवा में मार करने वाली 'अस्त्र' मिसाइल और सतह से सतह पर मार करने वाली 'प्रलय' सामरिक बैलिस्टिक मिसाइल की तकनीक निजी कंपनियों को दी जाएगी। इसके अलावा अन्य पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों के डिजाइन, विकास और उत्पादन से जुड़ी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियां भी साझा की जाएंगी। रक्षा मंत्रालय का मानना है कि इससे 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को मजबूती मिलेगी तथा भारतीय रक्षा उद्योग वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का अभिन्न अंग बन सकेगा। निजी कंपनियों को उत्पादन का अधिकार मिलने से निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी। इस निर्णय के दूरगामी प्रभाव होंगे। अभी तक मिसाइल जैसे संवेदनशील रक्षा उपकरणों का निर्माण केवल सरकारी प्रयोगशालाओं और सार्वजनिक उपक्रमों तक सीमित था। निजी क्षेत्र के प्रवेश से प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, लागत में कमी आएगी और डिलीवरी की समयसीमा में सुधार होगा। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम भारतीय रक्षा औद्योगिक आधार को विस्तार देने के साथ-साथ सशस्त्र बलों की भविष्य की जरूरतों को समय पर पूरा करने में सहायक होगा। सरकार ने स्पष्ट किया है कि तकनीक हस्तांतरण की प्रक्रिया पारदर्शी और सख्त सुरक्षा मानकों के अधीन होगी, ताकि सामरिक गोपनीयता बनी रहे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस अवसर पर कहा कि यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन के अनुरूप है जिसमें रक्षा क्षेत्र में आयात निर्भरता को शून्य करने और भारत को एक प्रमुख रक्षा निर्यातक देश बनाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने निजी उद्योग से आह्वान किया कि वे इस अवसर का लाभ उठाकर विश्वस्तरीय रक्षा उत्पाद विकसित करें। मंत्रालय ने तकनीक हस्तांतरण के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश और निगरानी तंत्र स्थापित करने के निर्देश भी दिए हैं, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। निष्कर्षतः, डीआरडीओ की मिसाइल तकनीक का निजी क्षेत्र को हस्तांतरण भारतीय रक्षा क्षेत्र के इतिहास में एक प्रतिमान स्थापित करने वाला कदम है। यह निर्णय न केवल घरेलू विनिर्माण क्षमता को सशक्त करेगा, बल्कि भारत को वैश्विक रक्षा बाजार में एक विश्वसनीय भागीदार के रूप में स्थापित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। आने वाले वर्षों में इसके परिणामस्वरूप स्वदेशी मिसाइल प्रणालियों के उत्पादन में तेजी आएगी और भारतीय सशस्त्र बलों की मारक क्षमता में गुणात्मक वृद्धि होगी।

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✍️ By Pradeep Yadav | 25 Aug 2026